ग्वालियर। 
ग्वालियर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने सिंधिया इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड बनाम भारत बिल्डर्स मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 26 साल पुरानी एक्स-पार्टी डिक्री को रद्द करते हुए दोबारा सुनवाई का आदेश दिया है। वहीं सिंधिया इन्वेस्टमेंट कंपनी पर 15000 रुपए का हर्जाना लगाया है। यह राशि कंपनी को एक महीने में जिला न्यायालय में जमा करनी होगी। हाईकोर्ट ने पाया कि साल 1999 में ट्रायल कोर्ट ने प्रतिवादी को "डीम्ड सर्व" मानकर एकतरफा आदेश पारित कर दिया था, जबकि नोटिस प्रक्रिया शुल्क के भुगतान न होने के कारण नोटिस कभी पहुंच ही नहीं पाए। यह गंभीर त्रुटि थी, जिससे प्रतिवादी पक्ष को अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला।
आगे की प्रक्रिया

  • 15 मार्च 1999 को पारित एक्स-पार्टी डिक्री अब नए सिरे से सुनी जाएगी।
  • दोनों पक्षों को 17 अक्टूबर 2025 को ट्रायल कोर्ट में उपस्थित होना होगा।
  • हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश ही नोटिस माना जाएगा, अब अलग से कोई समन जारी नहीं होगा।
  • 26 साल बाद यह मामला नए सिरे से शुरू होगा।

क्या है पूरा मामला

  • 1998 – भारत बिल्डर्स ने दावा पेश किया कि सिंधिया इन्वेस्टमेंट कंपनी ने नदी गेट पर बाउंड्रीवॉल बनाई थी, जिससे मोती तबेले का गेट बंद हो गया।
  • नोटिस सिंधिया इन्वेस्टमेंट कंपनी तक नहीं पहुंचे और 1999 में एक्स-पार्टी डिक्री पारित हो गई।
  • कंपनी ने जिला न्यायालय में अपना पक्ष रखने का प्रयास किया, लेकिन आवेदन खारिज हुआ।
  • इसके बाद कंपनी ने 2009 में हाईकोर्ट में सिविल रिवीजन दायर की।