300 साल पुरानी परंपरा निभाने पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया, यहां एक साथ होती है आरती और इबादत
ग्वालियर।
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को ग्वालियर के महाराजबाड़ा में बनी गोरखी परिसर पहुंचकर शाही परंपरा के तहत बाबा मंसूर शाह औलिया के उर्स में भाग लिया. यह एक 300 साल पुरानी परंपरा है, सिंधिया परिवार लगातार निभा रहा है. ज्योतिरादित्य सिंधिया ने शाही परिधान धोती और ओढ़नी पहनकर कर देवघर में बाबा मंसूर शाह की दरगाह पर इबादत की, उन्होंने पारंपरिक तौर पर तब तक प्रतीक्षा की, जब तक फूलों से सजी गुम्बद से एक फूल नीचे नहीं गिरा, जैसे ही फूल गिरा, सिंधिया ने उसे श्रद्धा से उठाया और मत्था टेककर आशीर्वाद लिया. ग्वालियर में यह एक ऐसी जगह है, जहां पूजा और इबादत दोनों होती है. जिसका अपना एक लंबा इतिहास रहा है. ग्वालियर के महाराजबाड़ा क्षेत्र में स्थित देवघर मंदिर परिसर सिंधिया परिवार द्वारा निर्मित है, यहां गर्भगृह में कुलदेवता ज्योतिबा नाथ महाराज सहित विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों के साथ-साथ बाबा मंसूर शाह औलिया के अवशेष भी प्रतिष्ठित हैं, यह स्थल हिंदू और सूफी परंपराओं के सांस्कृतिक संगम का अनोखा उदाहरण है. जहां दोनों वर्गों के लोग आते हैं. पूरे आयोजन के दौरान शहनाइयों और वाद्य यंत्रों की धुन पर भजन-कीर्तन होते रहे, कार्यक्रम में सिंधिया राजपरिवार से जुड़े पुराने सरदारों और परिजनों ने भी भाग लिया और परंपरा अनुसार महाराज को बधाई दी.

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