हाथों में रची मेहंदी, आंखों में आंसू: सिलेंडर के लिए कलेक्ट्रेट की चौखट पर पहुंचा दूल्हा
ग्वालियर।
साहब, हाथों में मेहंदी लग गई है, हल्दी की रस्म हो चुकी है… कल 1100 मेहमानों का खाना बनना है और हलवाई कह रहा है कि बिना गैस के कड़ाही नहीं चढ़ेगी। निमंत्रण पत्र बंट चुके हैं, अब मैं क्या करूं? यह गुहार उस दूल्हे की थी जो अपनी शादी की खुशियां छोड़कर कलेक्ट्रेट की सीढिय़ां चढ़ रहा था। शहर में गहराते गैस संकट ने अब शादियों की शहनाई के बीच हाहाकार मचा दिया है। दूल्हे ने अपनी शादी का कार्ड और रंगे हुए हाथ अफसरों को दिखाए, लेकिन जवाब मिला, सिलेंडर उपलब्ध नहीं हैं।
13 सिलेंडर की जरूरत, प्रशासन ने दिखाया ठेंगा
शादी के जोड़े में सजने को तैयार राकेश निवासी गुड़ा गुड़ी नाका ने बताया कि 26 मार्च को विवाह समारोह है और 25 मार्च (बुधवार) से खाना बनना शुरू होना है। हलवाई ने 13 कमर्शियल सिलेंडरों की डिमांड रखी है। जब दूल्हे ने अपनी बेबसी अधिकारियों के सामने रखी, तो जिला आपूर्ति नियंत्रक ने कोटा और गाइडलाइन का हवाला देते हुए हाथ खड़े कर दिए। प्रशासन ने दूल्हे को मशवरा दिया कि वह विकल्प के तौर पर लकड़ी की भट्टी या डीजल चूल्हे का इंतजाम करे।
कोटा सिस्टम में शादियां गायब
राज्य शासन की नई गाइडलाइन ने शादी वाले घरों की मुसीबत बढ़ा दी है। कुल स्टॉक का अधिकांश हिस्सा अस्पतालों और सुरक्षा बलों के लिए आरक्षित है।
होटल-रेस्टोरेंट: केवल 9% कोटा
शादी समारोह: इस श्रेणी को अलग से प्राथमिकता में नहीं रखा गया है।
यही कारण है कि अप्रैल में होने वाली शादियों के लिए भी लोग अभी से आवेदन लेकर दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। वर्तमान में एजेंसियों के पास 1226 कमर्शियल सिलेंडर का स्टॉक है, लेकिन वह आम जनता की पहुंच से बाहर है। शादी के कार्ड लेकर बड़ी संख्या में लोग आवेदन दे रहे हैं। दूल्हा भी स्वयं आया था, लेकिन कमर्शियल सिलेंडर की भारी कमी है। हमारी प्राथमिकता अस्पताल और सुरक्षा बल हैं। फिलहाल हम शादियों के लिए सिलेंडर उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं हैं। अरविंद भदौरिया, जिला आपूर्ति नियंत्रक
डिलेवरी मैसेज अलग, कीमत अलग
घरेलू सिलेंडरों की कालाबाजारी और मनमानी वसूली की शिकायतें सामने आने लगी हैं। जनसुनवाई में सिरासौद निवासी संतोष शुक्ला ने राधा कृष्णा भारत गैस एजेंसी पर आरोप लगाया कि बुकिंग के बाद मोबाइल पर डिलेवरी का मैसेज आ गया, लेकिन सिलेंडर नहीं मिला। एजेंसी पहुंचने पर 1450 रुपए की मांग की गई, जो तय दर से ज्यादा है। प्रेम किशोर ने भी शिकायत की कि पहले सिलेंडर देने से मना किया गया, फिर 1700 रुपए मांगे गए, बाद में 1400 में देने की बात हुई। ग्रामीणों का कहना है कि पूरे क्षेत्र में उपभोक्ताओं से इसी तरह वसूली हो रही है। उन्होंने एजेंसी की जांच कर कार्रवाई की मांग की। जनसुनवाई में एक अलग मामला भी आया, जहां इंद्रपाल सिंह दादौरिया ने बेटे की शादी के लिए 12 व्यावसायिक सिलेंडर दिलाने की गुहार लगाई, ताकि 1500 मेहमानों के भोजन की व्यवस्था हो सके। अपर कलेक्टर सहित अन्य अधिकारियों ने लोगों की समस्याएं सुनी।

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