गुना में जयवर्धन की 'ट्रैक्टर क्रांति': 10 KM तक थमा हाईवे, हाईवे पर गेहूं बिछाकर किसानों ने भरी हुंकार
गुना।
किसानों को न्याय और उनके अधिकार दिलाने के लिए कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। प्रदेशव्यापी आंदोलन के तहत गुरुवार को गुना में नेशनल हाईवे-46 स्थित बिलोनिया के पास वाहनों के पहिए पूरी तरह थम गए। राघौगढ़ विधायक और कांग्रेस जिला अध्यक्ष जयवर्धन सिंह के नेतृत्व में हजारों कार्यकर्ताओं और किसानों ने तीखी धूप के बीच आग उगलती हाइवे की सड़क पर बैठकर चक्काजाम किया केंद्र व प्रदेश की भाजपा सरकार के खिलाफ जोरदार हुंकार भरी। कांग्रेस ने समर्थन मूल्य खरीदी में किसानों के सामने आ रहीं चुनौतियों का जिक्र करते हुए भाजपा सरकार को गूंगा-बहरा करार दिया। आंदोलन का खास आकर्षण विधायक जयवर्धन सिंह का अंदाज रहा, वह गुना के गायत्री मंदिर से बिलोनिया तक स्वयं ट्रैक्टर चलाकर पहुंचे। उनके साथ बमौरी विधायक इंजी. ऋषि अग्रवाल सहित गुना और अशोकनगर जिले के दिग्गज नेताओं का हुजूम उमड़ पड़ा। करीब 2 घंटे तक हुए चक्काजाम के दौरान हाइवे पर दोनों लगभग 10 किलोमीटर तक वाहनों की कतारें देखने को मिलीं। जयवर्धन सिंह अपने साथ उन किसानों के पंजीयन और स्लॉट बुकिंग के दस्तावेज भी लेकर आए थे, जिनकी तारीख मिलने के बावजूद भी सरकारी केंद्रों पर उपज नहीं खरीदी गई। प्रदर्शन में शामिल हुए आक्रोशित किसानों ने अपनी गेहूं की उपज हाईवे पर ही रख दी। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि भाजपा ने चुनाव से पहले 2700 प्रति क्विंटल गेहूं खरीदने का वादा किया था, लेकिन हकीकत में किसानों को 2 हजार से 2100 में फसल बेचनी पड़ी। यह सरकार की नाकामी है। इतना ही नहीं ग्वालियर-चंबल संभाग में खरीदी सबसे देरी से शुरू की गई, जिससे छोटे किसान औने-पौने दाम पर अनाज बेचने को मजबूर हो गए। जयवर्धन ने बताया कि 15 मार्च से पंजीयन और स्लॉट बुकिंग होने के बाद भी कई दिनों तक खरीदी केंद्र बंद रहे या प्रक्रिया में देरी हुई। उन्होंने कहा कि पिछले डेढ़ महीने में भाजपा सरकार का रवैया किसानों के प्रति पूरी तरह निराशाजनक रहा है। यह सरकार केवल गौतम अदाणी के हितों के लिए काम कर रही है। आज देश का किसान घुट-घुटकर सांस लेने को मजबूर है। आंदोलन के दौरान यूरिया और डीएपी वितरण की नई व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए। कांग्रेस का आरोप है कि खाद की आनलाइन प्रक्रिया इतनी जटिल कर दी गई है कि किसान दुकानों के चक्कर काट रहा है। साथ ही दो बीघा खेती पर मात्र एक बोरी यूरिया और एक हेक्टेयर पर एक बोरी डीएपी देने का नियम किसानों के घाव पर नमक छिड़कने जैसा है। चक्काजाम के समापन पर किसानों की 14 सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन मौके पर पहुंचे अपर कलेक्टर अखिलेश जैन को सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसानों को फसल का सही दाम और खाद-बीज की सुगम व्यवस्था नहीं मिली, तो यह आंदोलन आने वाले समय में और भी उग्र रूप धारण करेगा। वहीं जयवर्धन सिंह ने चक्काजाम के दौरान वाहन चालकों और अन्य लोगों को हुई परेशानी के लिए माफी मांगी। उन्होंने कहा कि किसानों की फसल समर्थन मूल्य पर नहीं खरीदी जा रही है, यह मुद्दा इतना बड़ा था कि हम सभी को थोड़ी परेशानी उठानी पड़ी। इसके लिए वे खेद प्रकट करते हैं। आंदोलन की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कांग्रेस ने सुबह 10.30 बजे का समय किसानों को दिया था, लेकिन बमौरी और गुना के अधिकांश गांवों से सुबह 9 बजे ही किसान बिलोनिया पहुंचना शुरु हो गए थे। वहीं कुछ किसान तो नानाखेड़ी मंडी में उपज बेचने के दौरान अपना नंबर छोड़कर बिलोनिया आ गए और कांग्रेस की अगुवाई में अपना आक्रोश जताया। जयवर्धन ने किसानों को भरोसा दिलाया कि वे सरकार से उनका हक अधिकार और न्याय दिलाकर ही दम लेंगे। आंदोलन का दिलचस्प घटनाक्रम यह भी रहा कि क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने नेशनल हाइवे पर चक्काजाम की वजह से किसानों की सेहत को लेकर चिंता जताते हुए प्याज की माला भेजी। सिंधिया द्वारा भेजी गई माला कांग्रेस की महिला जिला अध्यक्ष सीमा यादव ने पहन ली और कहा कि केंद्रीय मंत्री इसी तरह किसानों की चिंता करें तो अच्छा होगा। इसपर पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह ने तंज कसा और सिंधिया पर आरोप लगाया कि वे केवल प्याज तक ही सीमित हैं, उन्होंने कभी किसानों की चिंता नहीं, उनकी बात नहीं उठाई। इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी किसानों के लिए चिंतित होने की वजह कह चुके हैं, इसपर भी जयवर्धन सिंह ने दिखावे का आरोप लगाया।

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