गुना। 
गुना जिले के कोतवाली थाना प्रभारी टीआई चंद्रप्रकाश सिंह चौहान को हाई कोर्ट ग्वालियर ने सस्पेंड करने और उनके खिलाफ विभागीय जांच बैठाने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने यह कार्रवाई एक युवती की शिकायत पर दर्ज मामले में आरोपी महिला को गिरफ्तार न करने और न्यायिक आदेशों की अवहेलना को लेकर की है। हाई कोर्ट ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए हैं कि एक माह के भीतर पालन प्रतिवेदन न्यायालय में प्रस्तुत किया जाए।
ऐसे सामने आया मामला
कोतवाली थाना क्षेत्र में रहने वाली एक युवती ने 8 अक्टूबर को थाने में शिकायत आवेदन दिया था। युवती ने बताया कि वह कैंट इलाके में रहने वाले एक युवक को पिछले छह वर्षों से जानती थी और दोनों के बीच रिलेशनशिप था। बाद में उसे जानकारी मिली कि युवक पहले से शादीशुदा है। इसके बाद दोनों ने आपसी सहमति से संबंध समाप्त कर लिए। इस दौरान युवक के मोबाइल में दोनों के कुछ निजी फोटो मौजूद थे, जिन पर युवती को कोई आपत्ति नहीं थी।
सोशल मीडिया पर फोटो वायरल करने का आरोप
युवती के अनुसार करीब छह महीने पहले युवक की पत्नी ने उसे फोन कर धमकी दी कि उसके पास अश्लील फोटो हैं, जिन्हें वह सोशल मीडिया पर वायरल कर देगी। 27 सितंबर को युवती ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर देखा कि आरोपी महिला ने उसकी निजी तस्वीरें पोस्ट कर दी हैं। जब युवती ने इसका विरोध किया तो आरोपी महिला ने फोटो हटाने से इनकार करते हुए और फोटो वायरल करने की धमकी दी। 8 अक्टूबर को युवती के एक मित्र ने उसे सूचित किया कि उसकी एक और आपत्तिजनक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। जांच करने पर पता चला कि आरोपी महिला ने युवती को ब्लॉक कर दिया था और दूसरी आईडी से देखने पर फोटो दोबारा पोस्ट की गई थी।
FIR दर्ज, लेकिन गिरफ्तारी नहीं हुई
युवती की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं में मामला दर्ज किया। इसके बाद आरोपी महिला ने पहले ट्रायल कोर्ट और फिर हाई कोर्ट ग्वालियर में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, जिसे दोनों अदालतों ने खारिज कर दिया। इसके बावजूद कोतवाली थाना प्रभारी ने आरोपी महिला को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 41A के तहत नोटिस तामील कराकर थाने से छोड़ दिया।
पीड़िता ने हाई कोर्ट में लगाई गुहार
आरोपी की गिरफ्तारी न होने से नाराज पीड़िता ने हाई कोर्ट में रिट याचिका दायर की। याचिका में आरोप लगाया गया कि पुलिस आरोपी महिला को संरक्षण दे रही है और जानबूझकर गिरफ्तारी नहीं की जा रही है। याचिका में गुना पुलिस अधीक्षक, कोतवाली थाना प्रभारी और आरोपी महिला को पक्षकार बनाया गया। याचिका पर सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने कहा कि निचली अदालत और उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत खारिज किए जाने के बावजूद आरोपी को गिरफ्तार न करना न्यायिक आदेशों की भावना के विपरीत है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में धारा 41A का प्रयोग कर आरोपी को राहत देना न्यायिक आदेशों की घोर अवहेलना है और इससे पक्षपात व बाहरी प्रभाव की आशंका उत्पन्न होती है।
सस्पेंशन और विभागीय जांच के आदेश
हाई कोर्ट ने आदेश में कहा कि थाना प्रभारी का आचरण प्रथम दृष्टया अधिकारों के जानबूझकर दुरुपयोग। कर्तव्य की अवहेलना। पुलिस अधिकारी के लिए अशोभनीय व्यवहार को दर्शाता है। कोर्ट ने निर्देश दिए हैं कि थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड किया जाए और पुलिस अधीक्षक से कम रैंक के अधिकारी से विभागीय जांच कराई जाए।
चार सप्ताह में रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि जांच समयबद्ध तरीके से पूरी की जाए और आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के चार सप्ताह के भीतर जांच की प्रगति और पालन रिपोर्ट हाई कोर्ट में प्रस्तुत की जाए।इन निर्देशों के साथ याचिका का निपटारा कर दिया गया।