बीजेपी विधायक के खेत से अतिक्रमण हटाने के लिए 'अभेद किला' बना सिरसौदिया गांव, 400 पुलिसकर्मियों ने मिलकर तोड़े 3 गरीबों के मकान
धार।
मध्य प्रदेश के धार जिले में एक निजी जमीन से अतिक्रमण हटाने का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। मामला भारतीय जनता पार्टी के विधायक कालू सिंह ठाकुर के खेत से जुड़ा है, जिसे खाली कराने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी। सिरसौदिया गांव में तीन गरीबों के कच्चे मकानों को हटाने के लिए धार पुलिस ने किसी बड़े सैन्य ऑपरेशन जैसी तैयारी की थी। कार्रवाई के दौरान कानून व्यवस्था न बिगड़े, इसके लिए गांव को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया। मौके पर तैनात अमले में शामिल थे:
1 एडिशनल एसपी (ASP)
8 डीएसपी / एसडीओपी (DSP/SDOP)
18 थानों के टीआई (TI)
400 सशस्त्र पुलिस जवान
3 जेसीबी मशीनें और राजस्व विभाग का पूरा अमला
क्यों पड़ी इतने फोर्स की जरूरत?
दरअसल, 9 मार्च (रंगपंचमी के अगले दिन) जब पुलिस और प्रशासन की टीम पहली बार अतिक्रमण हटाने पहुंची थी, तब गांव वालों ने भारी पथराव कर दिया था। उस झड़प में थाना प्रभारी प्रवीण ठाकरे गंभीर रूप से घायल हुए थे, जिन्हें इंदौर रेफर करना पड़ा था। इसके अलावा एक महिला अधिकारी भी चोटिल हुई थीं। इसी विरोध को देखते हुए दोबारा की गई कार्रवाई में प्रशासन ने कोई जोखिम नहीं उठाया।
क्या कहते हैं जानकार...
वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र जैन के अनुसार, यह कार्रवाई प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। चर्चा है कि क्या एक आम नागरिक की जमीन खाली कराने के लिए भी पुलिस इतनी ही मुस्तैदी और भारी बल का प्रयोग करती? विधायक जी का खेत खाली हो गया, पुलिस को सफलता मिल गई, लेकिन जिनके घर टूटे हैं वो रो रहे हैं।
प्रशासन का पक्ष
मनावर एसडीएम प्रमोद सिंह गुर्जर का कहना है कि यह कार्रवाई माननीय न्यायालय के आदेश के पालन में की गई है। प्रशासन का दावा है कि अतिक्रमणकारी ने स्वयं लिखित सहमति दी थी और शांतिपूर्वक अपना सामान हटाया है। प्रशासन ने यह भी कहा कि उक्त परिवार के पास पास ही एक अन्य जमीन का टुकड़ा है, जहाँ वे शिफ्ट हो सकते हैं।
पीड़ित की गुहार: "जंगल में रहेंगे साहब"
दूसरी ओर, जिस गरीब का मकान टूटा है, उसका दर्द कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। पीड़ित का कहना है कि उसे संभलने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। जब उससे पूछा गया कि अब वह कहाँ रहेगा, तो उसका जवाब था— "जंगल में रहेंगे साहब, हमारे पास कोई और व्यवस्था नहीं है।"

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