दतिया ।
मुझे साहब से मिला दो.... मैं ही साहब हूं... नहीं मुझे, साहब से मिला दो। दतिया कलेक्टर की जनसुनवाई में एक बुजुर्ग लगातार उनसे यह गुहार लगा रहा था कि मुझे मिला दो। यह पूरा मामला दतिया कलेक्टर स्वपनिल वानखेड़े से जुड़ा है। जनसुनवाई के दौरान हॉल में बैठकर लोगों की शिकायतें सुन रहे थे। इस दौरान एक बुजुर्ग आकर उन्हीं से कहने लगे कि मुझे साहब से मिला दो।
जनसुनवाई में पहुंचा बुजुर्ग
दरअसल, मध्य प्रदेश में हर मंगलवार को कलेक्ट्रेट ऑफिस में जनसुनवाई होती है। इस दौरान या तो कलेक्टर खुद मौजूद रहते हैं या फिर अन्य अधिकारी रहते हैं। लोग आवेदन लेकर आते हैं और उनकी सुनवाई होती। मंगलवार को एक बुजुर्ग पेंशन की शिकायत को लेकर कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचा था। जनसुनवाई के दौरान दतिया कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े खुद ही मौजूद थे। बुजुर्ग आवेदन लेकर उन्हीं के पास पहुंचा और उनसे कहने लगा कि मुझे साहब से मिलना है।
मैं ही साहब हूं...
वहीं, बुजुर्ग की बातों को सुनकर कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने कहा कि मैं ही साहब हूं। इसके बाद बुजुर्ग ने दो-तीन बार यह बात दोहराई कि मुझे साहब से मिलना है। कलेक्टर भी हंसते हुए बार-बार कहते रहे कि मैं ही साहब हूं। तब जाकर बुजुर्ग को यकीन हुआ। इसके बाद कलेक्टर स्वप्निल वानखेड़े ने उनका आवेदन लिया और कहा कि जाइए आपका पेंशन चालू हो जाएगा।