भोपाल। 
यदि कोई व्यक्ति राष्ट्रीय  स्वयंसेवक संघ की प्रशंसा करता है तो यह प्रशंसा देश के लोह पुरुष वल्लभ भाई पटेल का अपमान कैसे हो सकती है? दरअसल स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश  को संबोधित किया और इसी के साथ उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का नाम लेकर उनके 100 वर्ष पूरे होने पर उनकी प्रशंसा की और प्रशंसा ऐसी की कि शायद कुछ लोगों को यह प्रशंसा अच्छी नहीं लगी। कांग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे लेकर एक वीडियो पोस्ट किया है और सुप्रिया श्रीनेत का कहना है कि लाल किले की प्राचीर से  आरएसएस की प्रशंसा करना देश के पूर्व गृहमंत्री लोह पुरुष वल्लभ भाई पटेल का अपमान है। क्योंकि सरदार वल्लभ भाई पटेल ने आरएसएस को बैन किया था और यह कहकर बैन किया था कि आरएसएस देश विरोधी संस्था है और ऐसी संस्था को बैन करना चाहिए। आरएसएस इस देश में विभाजन का धार्मिक उन्माद की जड़ है और यह तब किया था जब आरएसएस से प्रेरित होकर नाथूराम गोडसे जो आजाद भारत का पहला आतंकवादी था उसने महात्मा गांधी की हत्या की थी।  ऐसी संस्था का नाम लाल किले की प्राचीर से आजादी वाले दिन लेना सरदार वल्लभ भाई पटेल का घोर अपमान है और इसकी हम सब निंदा करते हैं। सुप्रीया कांग्रेस की प्रवक्ता हैं राष्ट्रीय नेता हैं और वे लगातार यह कह रही हैं के लाल किले की प्राचीर से संघ की तारीफ करना यह पटेल साहब का अपमान है। अब यह बात  समझ में नहीं आई कि यह पटेल साहब का अपमान क्यों है? संघ और कांग्रेस के खट्टे मीठे संबंध चलते रहे हैं। गांधी जी की हत्या के बाद में संघ पर जब आरोप लगा तो संघ को प्रतिबंधित किया। लेकिन जांच में जब संघ का नाम नहीं आया तो प्रतिबंध हटा दिया गया। तो उसे लेकर आज तक कांग्रेस के लोग यह क्यों कह रहे हैं कि पटेल साहब ने प्रतिबंध लगाया था। निश्चित तौर पे वल्लभ भाई पटेल उस समय गृह मंत्री थे। सरकार ने यदि निर्णय लिया तो उसका पालन गृह मंत्री को ही करना था। तो यह कहना कि वल्लभ भाई पटेल संघ के खिलाफ थे या उन्होंने प्रतिबंध लगाया। संघ की तारीफ करना उनका अपमान है। यह कहीं से भी समझ में नहीं आता है।  प्रधानमंत्री ने खुले मंच से लाल किले की प्राचीर से संघ और उसके काम की तारीफ की है। उसे एक राष्ट्रवादी संगठन बताया है। हम लेकिन इसमें यह बात जरूर है कि संघ की तारीफ करना वल्लभ भाई पटेल का अपमान कैसे हो सकता है? यह एक बड़ा सवाल है।