'अरबपति' विधायक की किरकिरी: पहले सरकारी लिस्ट से कटा नाम, फिर जिल्लत से बचने के लिए संजय पाठक ने स्कूटर पर खुद ही रचा लिया 'पावर शो'!
भोपाल/कटनी।
मध्य प्रदेश की सियासत में 'अरबपति' छवि और अपने आलीशान संसाधनों के लिए मशहूर भाजपा विधायक संजय पाठक और सरकार के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। मामला पूरी तरह डिरेल हो चुका है। ताजा विवाद मध्य प्रदेश सरकार के 'जल गंगा संवर्धन अभियान' के मुख्य अतिथियों की सूची को लेकर खड़ा हुआ है। पहले सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने कटनी जिले के मुख्य कार्यक्रम के लिए विजयराघवगढ़ के वरिष्ठ विधायक संजय पाठक को चीफ गेस्ट बनाया, लेकिन महज 24 घंटे के भीतर मुख्यमंत्री के निर्देश पर आदेश संशोधित कर उनका नाम काट दिया गया। संजय पाठक की जगह संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी को मुख्य अतिथि बनाकर कटनी भेजा गया, जिसे राजनीतिक हलकों में संजय पाठक का बड़ा सार्वजनिक अपमान माना जा रहा है।
अपमान से बचने के लिए एक ही जिले में हुए 'दो-दो' कार्यक्रम
मुख्य अतिथि की सूची से नाम कटने के बाद कटनी जिले में भारी किरकिरी और समर्थकों के गुस्से को देखते हुए एक अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई। अपनी राजनीतिक साख और जिल्लत से बचने के लिए संजय पाठक ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगम में अध्यक्ष (कजिन भाई) के जरिए कटनी शहर में एक अलग ही समानांतर कार्यक्रम आयोजित करवा डाला। नतीजतन, कटनी मध्य प्रदेश का एकमात्र ऐसा 'अजूबा' जिला बन गया जहाँ एक ही सरकारी अभियान के दो अलग-अलग कार्यक्रम हुए:
सरकारी मुख्य कार्यक्रम बहोरीबंद में हुआ, जहाँ सरकार के घोषित चीफ गेस्ट मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी पहुंचे। समानांतर कार्यक्रम कटनी शहर (मुड़वारा विधानसभा) में हुआ, जहाँ खुद संजय पाठक इलेक्ट्रिक स्कूटर पर बिना हेलमेट लगाए चीफ गेस्ट बनकर पहुंचे और शपथ दिलाई। हालांकि, अचानक हुए इस कार्यक्रम में आधी कुर्सियां खाली नजर आईं।
बीजेपी की गुटबाजी आई सतह पर, स्थानीय विधायकों ने किया 'अघोषित बहिष्कार'
इस पूरे घटनाक्रम ने कटनी भाजपा की अंदरूनी गुटबाजी को सरेआम उजागर कर दिया है। कटनी शहर का कार्यक्रम जिस मुड़वारा विधानसभा क्षेत्र में रखा गया था, वहाँ के वरिष्ठ भाजपा विधायक संदीप जायसवाल ने इस पूरे आयोजन से दूरी बनाए रखी। उन्होंने अघोषित रूप से संजय पाठक के इस कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया और शामिल नहीं हुए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पहले संजय पाठक का नाम तय होना और फिर स्थानीय विधायकों (संदीप जायसवाल और प्रणय पांडे) के कथित विरोध के दबाव में सरकार द्वारा नाम बदला जाना, यह साफ करता है कि जिले में गुटबाजी चरम पर है।
443 करोड़ की रिकवरी और कोर्ट का विवाद: लगातार घिर रहे हैं पाठक
यह पहली बार नहीं है जब संजय पाठक अपनी ही सरकार के निशाने पर आए हों। इससे पहले खुद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में जानकारी दी थी कि संजय पाठक और उनके परिवार की खनन कंपनियों ने अतिरिक्त (एक्सेस) उत्खनन यानी खनिज की चोरी की है, जिसके एवज में उन पर 443 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रिकवरी निकाली गई है। इसके अलावा, इस रिकवरी मामले को लेकर हाई कोर्ट के जज को प्रभावित करने की कोशिशों के आरोप भी मीडिया में सुर्खियां बन चुके हैं। विधानसभा के भीतर भी कटनी के अन्य विधायकों ने संजय पाठक के मुद्दों से किनारा कर उन्हें अकेला छोड़ दिया था।
'जाएं तो जाएं कहां?'... अपमान के बाद भी BJP में रहना मजबूरी!
वरिष्ठ पत्रकारों और उनके करीबियों का मानना है कि कभी कांग्रेस के दिग्गज नेता रहे संजय पाठक ने अपने पिता की प्रतिष्ठा और स्वाभिमान की खातिर कांग्रेस छोड़ी थी। कांग्रेस और अब भाजपा, दोनों ही दलों को उन्होंने अपने विमान, हेलीकॉप्टर और अथाह संसाधन खुलकर उपलब्ध कराए। लेकिन आज स्थिति यह है कि अपनी ही सरकार उन्हें लगातार कटघरे में खड़ा कर रही है। इसके बावजूद, वे ज्योतिरादित्य सिंधिया की तरह कोई 'बगावती चिंतन' या दल बदलने का फैसला नहीं ले पा रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, संजय पाठक का माइनिंग और बिजनेस का साम्राज्य इतना बड़ा है कि वे कई सरकारी जांचों और करोड़ों की रिकवरी के जाल में घिरे हुए हैं। ऐसे में फिलहाल कितना भी अपमान झेलना पड़े, भाजपा में बने रहना ही उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक मजबूरी है।

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