कटनी में CM का अभिनंदन क्यों न हो? "गले में हाथ डालने वाले गए, अब 'फाइल' देखने वाले आए हैं !
कटनी, सबकी खबर।
कल 14 मार्च को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव विजयराघवगढ़ पहुंच रहे हैं। राजनीति के गलियारों में शोर है कि कांग्रेस विरोध कर रही है, जीतू पटवारी ने 5 सुलगते सवाल पूछे हैं और पूर्व प्रत्याशी नीरज बघेल सड़क पर हैं। लेकिन, असल बात तो यह भी हैं कि क्यों नहीं होना चाहिए शोर और क्यों नहीं होना चाहिए भव्य स्वागत मुख्यमंत्री मोहन यादव का। ये वहीं मुख्यमंत्री हैं जिन्होंने पूरी दिलेरी के साथ अपने ही विधायक पर एक्सेस माइनिंग के मामले में फाइन लगाने की हिम्मत दिखाई हैं और तमाम फाइलों पर जांच भी बिठा दी हैं यह साहस तो कांग्रेस की सरकार में भी नहीं हो पाया था। रही बात कांग्रेस की तो कांग्रेस के युवा प्रदेश अध्यक्ष ने एक पत्र जारी कर सूबे की सियासत में हल्ला तो कर दिया हैं। कांग्रेस का आरोप है कि जिस विधायक (संजय पाठक) के परिवार पर ₹443 करोड़ की माइनिंग रिकवरी, 1143 एकड़ आदिवासी जमीन हड़पने और सहारा लैंड स्कैम जैसे गंभीर आरोप हैं, मुख्यमंत्री उनके साथ मंच साझा क्यों कर रहे हैं?
लेकिन यहां सवाल यह भी हैं कि मोहन यादव ने कुछ तो साहस दिखाया
शिवराज और कमलनाथ ने क्या किया? रिपोर्ट के मुताबिक, जो फाइलें सालों से दबी थीं, उन्हें मोहन यादव सरकार ने खोला। 18 महीने की कांग्रेस सरकार में कमलनाथ जी तो रिसॉर्ट की परमिशन दे रहे थे, फिर आज विरोध किस बात का? यह मोहन यादव सरकार ही है जिसने अपनी ही पार्टी के कद्दावर विधायक की खदानों की 'इंची टेप' से नपती करवाई और विधानसभा में सीना ठोक कर ₹443 करोड़ की रिकवरी की बात कही। सहारा जमीन मामले में FIR और आदिवासियों की जमीन के कागजात बाहर लाना, यह साबित करता है कि सीएम 'चेहरा' देखकर नहीं, 'फाइल' देखकर फैसला ले रहे हैं।
राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र जैन का साफ कहना है कि विजयराघवगढ़ की जनता को तो मुख्यमंत्री पर फूल बरसाने चाहिए। अपनी ही पार्टी के रसूखदार विधायक के खिलाफ जांच बैठाने का दम आज के दौर में किसी और मुख्यमंत्री में नहीं है। यह 'कानून का राज' स्थापित करने की कोशिश है।"राजनीति अपनी जगह है, लेकिन अगर कोई मुख्यमंत्री 'अपनों' के खिलाफ फाइलें खोलने का साहस दिखाता है, तो वह वाकई एक 'कड़क' कदम है। अब देखना यह है कि कल के दौरे में सीएम इन आरोपों पर अपनी चुप्पी तोड़ते हैं या नहीं।
जीतू पटवारी के 5 सवाल जो चर्चा में हैं
- ₹443 करोड़ की माइनिंग रिकवरी कब होगी?
- 1143 एकड़ आदिवासी जमीन के फर्जीवाड़े पर एक्शन कब?
- 309 एकड़ सहारा की जमीन पर EOW की FIR का स्टेटस क्या है?
- 311 गरीब परिवारों के प्लॉट की रजिस्ट्रियों का सच क्या है?
- क्या हाईकोर्ट को प्रभावित करने के आरोपी विधायक के साथ मंच साझा करना उचित है?

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