मप्र स्वास्थ्य विभाग में बड़ा 'खेल'! खुद की मेडिकल कंपनी चलाने वाले डॉक्टर बने टेक्निकल चीफ; गुपचुप आदेश से सियासी भूचाल
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर बड़े विवादों के घेरे में है। विभाग में गुपचुप तरीके से एक ऐसा आदेश जारी किया गया है, जिसने प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। 'सबकी खबर' के मुताबिक, इंदौर के डॉक्टर पंकज पाराशर को मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विसेस कॉरपोरेशन का नया 'टेक्निकल चीफ' नियुक्त किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ. पाराशर खुद की प्राइवेट मेडिकल डिवाइसेस कंपनी चलाते हैं और अब मध्य प्रदेश सरकार में होने वाली अरबों रुपये की दवा और उपकरण खरीदी की चाबी भी उन्हीं के हाथों में सौंप दी गई है।
29 जून का 'गोपनीय' आदेश आया सामने
यह पूरा मामला तब खुला जब बीते 29 जून को चिकित्सा शिक्षा विभाग (DME) की डायरेक्टर डॉ. अरुणा कुमार द्वारा जारी किया गया एक आदेश सोशल मीडिया और मीडिया के हाथ लगा। इस आदेश के तहत इंदौर के गांधी मेडिकल कॉलेज में पदस्थ डॉ. पंकज पाराशर को भोपाल स्थित हेल्थ कॉरपोरेशन में काम करने के लिए अटैच किया गया है। इस आदेश को बेहद गुपचुप तरीके से दबाकर रखने की कोशिश की गई थी, जो अब सार्वजनिक हो चुका है।
आदेश में बड़ी प्रशासनिक खामियां और 'मनमानी'
इस ट्रांसफर और नियुक्ति आदेश पर कई गंभीर कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमतः डॉ. पाराशर को जिस पब्लिक हेल्थ कॉरपोरेशन में जॉइन करना है, उसके मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) को इस आदेश की प्रतिलिपि (Copy) भेजी ही नहीं गई। ऐसे में सवाल उठता है कि वह वहां जॉइनिंग कैसे करेंगे?
मंत्री को रखा गया अंधेरे में
मध्य प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के निज सचिव (कानूनी अमले) या मंत्री कार्यालय को इस आदेश की कोई सूचना या कॉपी नहीं दी गई। आशंका जताई जा रही है कि विभाग के बड़े अफसरों ने मंत्री को पूरी तरह अंधेरे में रखकर यह खेल किया है।
खुद की कंपनी और सरकारी नौकरी: नियमों की सरेआम धज्जियां
मध्य प्रदेश सिविल सेवा नियमों के मुताबिक, कोई भी सरकारी डॉक्टर या अधिकारी बिना सरकार की लिखित अनुमति के न तो किसी प्राइवेट कंपनी का पार्टनर बन सकता है और न ही कोई बिजनेस या स्टार्टअप चला सकता है।
लेकिन डॉ. पंकज पाराशर का मामला बिल्कुल उलट है:
कटिंग एज मेडिकल डिवाइसेस प्रा. लि.: डॉ. पाराशर 2015-16 से 'मैट टेक' (MedTech) स्टार्टअप और 'कटिंग एज मेडिकल डिवाइसेस प्राइवेट लिमिटेड' नाम की कंपनी खुद रन कर रहे हैं, जो ऑन-रिकॉर्ड है। बीते 20 जून को एक प्रमुख मीडिया हाउस ने डॉ. पाराशर की इस निजी कंपनी को लेकर विस्तार से खबर प्रकाशित की थी।
डायरेक्टर अरुणा कुमार के यू-टर्न पर सवाल
सबसे मजेदार और संदेहास्पद पहलू यह है कि 20 जून को जब अखबार ने डीएमई डायरेक्टर डॉ. अरुणा कुमार से इस बारे में पूछा था, तब उन्होंने बयान दिया था कि— "मुझे नहीं पता कि डॉ. पंकज पाराशर ऐसा कोई काम (निजी कंपनी) कर रहे हैं, यदि ऐसा है तो इंदौर के डीन उन पर कार्रवाई करें।" लेकिन, इस बयान के ठीक 9 दिन बाद यानी 29 जून को खुद डायरेक्टर अरुणा कुमार ने अपने डिजिटल सिग्नेचर से डॉ. पाराशर को प्रमोट करते हुए कॉरपोरेशन का टेक्निकल चीफ बनाने का आदेश जारी कर दिया।
200 करोड़ के हीमोग्लोबिन टेंडर और 'बलि का बकरा'
खबरों के मुताबिक, वर्तमान में मध्य प्रदेश में पूरे प्रदेश के लिए लगभग 200 से 225 करोड़ रुपये का हीमोग्लोबिन चेक करने वाले उपकरणों का टेंडर प्रक्रिया में है। इससे पहले गड़बड़ियों के चलते यह टेंडर एक बार कैंसिल हो चुका है और चर्चा है कि गुजरात की किसी कंपनी के साथ इसकी पूरी सेटिंग की जा चुकी है। जानकारों का मानना है कि आईएएस अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के बड़े सिंडिकेट ने भविष्य में किसी भी घोटाले की जांच से बचने के लिए डॉ. पंकज पाराशर को आगे किया है, ताकि यदि कल को कोई गड़बड़ी पकड़ी जाए, तो ठीकरा टेक्निकल चीफ के सिर पर फोड़ा जा सके।
मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग
एक ऐसा डॉक्टर जो खुद मेडिकल उपकरण बनाता और बेचता है, वही अब मध्य प्रदेश सरकार के लिए उपकरण खरीदने की पात्रता तय करेगा। यह सीधे तौर पर 'कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट' (हितों के टकराव) का सबसे बड़ा उदाहरण है। इस प्रशासनिक अराजकता के सामने आने के बाद अब मुख्यमंत्री मोहन यादव और उप-मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने और जांच के बाद कड़ी कार्रवाई करने की मांग की जा रही है।

30 जुलाई मतदान से पहले भाजपा का फुल दमखम, दतिया में निकलेगा CM मोहन यादव का रोड शो
‘कॉकरोच’ के बाद अब ‘E20 जनता पार्टी’ का हल्लाबोल, पेट्रोल मुद्दे पर बढ़ी सियासत
सोनम वांगचुक आज अस्पताल से होंगे छुट्टी, बापू को श्रद्धांजलि देकर लौटेंगे लद्दाख
संसद में फिर हंगामा, लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित
'हालात बेहद भयावह हैं…' असम बाढ़ पर सिंगर पापोन ने देशवासियों से लगाई मदद की गुहार