भोपाल/सागर। 
मध्य प्रदेश की डॉ. मोहन यादव सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। सरकार को ढाई साल (आधा कार्यकाल) पूरे होते-होते सत्ता और संगठन के बीच की दरारें अब खुलेआम सड़क पर आ चुकी हैं। प्रशासनिक अराजकता और राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में अब मुख्यमंत्री के अपने ही वरिष्ठ मंत्री एक-एक कर उनके खिलाफ बगावत का बिगुल फूंक रहे हैं। पहले इंदौर के कद्दावर नेता और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सीएम को चिट्ठी लिखकर सार्वजनिक मंच से घेरने की चेतावनी दी, और अब मोदी सरकार में केंद्रीय मंत्री रह चुके प्रदेश के कद्दावर नेता व कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल ने अपनी ही सरकार की पुलिस के खिलाफ सोशल मीडिया पर मोर्चा खोल दिया है।
प्रहलाद पटेल का खुला विद्रोह: सागर पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
ताजा विवाद सागर जिले के बांदरी थाना क्षेत्र का है, जिसने सरकार के भीतर मचे घमासान को सरेआम कर दिया है। नेशनल हाईवे-44 (सागर-ललितपुर मार्ग) पर स्थित 'सौरभ ढाबा' पर करीब दो साल पहले (23 जुलाई 2024 को) अवैध शराब बिक्री को लेकर विवाद हुआ था। लोधी समाज के युवा नेता और सागर जिला पंचायत सदस्य सर्वजीत सिंह लोधी ने आत्मरक्षा में वहां हवाई फायर किया था, जिसके बाद तत्कालीन थाना प्रभारी सुमेर सिंह जंगेत ने उन पर 'हत्या के प्रयास' (Attempt to Murder) समेत कई गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज की थी। लंबे समय तक शांत रहने के बाद, जैसे ही टीआई सुमेर सिंह की बांदरी थाने में दोबारा पोस्टिंग हुई, रविवार को पुलिस ने सर्वजीत सिंह लोधी को गिरफ्तार कर लिया। इस गिरफ्तारी के तुरंत बाद मंत्री प्रहलाद पटेल भड़क गए। उन्होंने मुख्यमंत्री या कैबिनेट में बात करने के बजाय सीधे सोशल मीडिया पर लिखा:
"मैं इस गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करता हूँ। 2 साल तक पुलिस क्या कर रही थी?"
प्रहलाद पटेल का यह कदम दिखाता है कि मंत्रियों का मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व पर से भरोसा डगमगा चुका है।
कैलाश विजयवर्गीय का 'चिट्ठी बम' और 'पट्ठा' पॉलिटिक्स
इस अंदरूनी कलह की शुरुआत दरअसल कैलाश विजयवर्गीय ने की थी। सूत्रों के मुताबिक, विजयवर्गीय मंत्री बनने के महज 3 महीने बाद से ही खुद को उपेक्षित महसूस कर रहे थे। इंदौर की राजनीति में 'पट्ठेबाजी' (चेला/शिष्य बनाने) की परंपरा का जिक्र करते हुए राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि विजयवर्गीय कभी मोहन यादव को अपना 'पट्ठा' मानते थे, लेकिन आज मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव ने उनके पर कतर दिए हैं।
कैलाश विजयवर्गीय की एक गोपनीय चिट्ठी भी पिछले दिनों लीक हुई थी, जिसमें उन्होंने मुख्यमंत्री पर सीधे आरोप लगाए थे:
अधिकारों की कटौती: विजयवर्गीय ने दर्द बयां किया था कि वे अपने विभाग में एक चपरासी का ट्रांसफर तक नहीं कर सकते।
इंदौर की उपेक्षा: उन्होंने लिखा कि इंदौर के विकास को लेकर मुख्यमंत्री उन्हें समय नहीं दे रहे हैं।
खुली चेतावनी: विजयवर्गीय ने साफ कहा था कि यदि जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो वे इन मुद्दों को 'सार्वजनिक मंचों' पर उठाएंगे।
प्रशासनिक अराजकता और 'असहाय' संगठन?

मध्य प्रदेश भाजपा में इस समय सबसे बड़ी कमजोरी संगठन के स्तर पर दिख रही है। प्रदेश में संगठन महामंत्री का पद खाली पड़ा है, जिसके कारण सत्ता और मंत्रियों के बीच कसावट लाने वाला कोई नहीं है। जब छोटे नेताओं से गलती होती है, तो उन्हें प्रदेश कार्यालय बुलाकर फटकार लगाई जाती है, लेकिन जब कैलाश विजयवर्गीय और प्रहलाद पटेल जैसे दिग्गज खुलेआम सरकार की फजीहत करा रहे हैं, तो संगठन मूकदर्शक बना हुआ है। न तो विजयवर्गीय को तलब किया गया और न ही प्रहलाद पटेल से कोई जवाब-तलब हुआ है।
आगे क्या? बद से बदतर हो रहे हालात
मध्य प्रदेश की सियासत में मंत्रियों का यह तेवर साफ संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में डॉ. मोहन यादव की मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं। परदे के पीछे होने वाली गुटबाजी अब सोशल मीडिया और मीडिया के जरिए जनता के सामने आ चुकी है। यदि मुख्यमंत्री ने संगठन के साथ मिलकर जल्द ही इस असंतोष को काबू में नहीं किया, तो एमपी में 'अराजकता' सरकार को निगल सकती है। कई और मंत्री भी अपनी बारी के इंतजार में हैं, जिनकी नाराजगी जल्द ही बाहर आ सकती है।