एमपी परिवहन विभाग या 'डकैतों का अड्डा'? ₹1700 करोड़ की सड़कछाप लूट का सनसनीखेज खुलासा!
भोपाल/शिवपुरी।
मध्य प्रदेश में इन दिनों 'रामराज्य' नहीं, बल्कि सड़कों पर 'वसूली राज' चल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की नाक के नीचे परिवहन विभाग के कुछ बेलगाम अधिकारी और उनके पाले हुए नकाबपोश गुंडे आम जनता और ट्रक ड्राइवरों की जेब पर दिन-दहाड़े डकैती डाल रहे हैं। वरिष्ठ पत्रकार रविंद्र जैन की रिपोर्ट और एक बड़े मीडिय हाउस द्वारा कराए गए एक स्टिंग ऑपरेशन ने विभाग की उस काली सच्चाई को उजागर किया है, जिसने सरकार के सुशासन के दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं।
शिवपुरी के सिकंदरा बैरियर पर 'खूनी वसूली'
14 तारीख की तड़के शिवपुरी-झांसी हाईवे पर जो हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया। नौ राज्यों का सफर तय कर आई एक बस को राजस्थान सीमा पर नकाबपोश बदमाशों ने रोका। आरोप है कि टीएसआई सुमन दीक्षित के संरक्षण में इन बदमाशों ने ड्राइवर से ₹2000 की 'एंट्री' मांगी। जब ड्राइवर लाखाराम ने वैध कागजात दिखाए, तो उसे लाठियों से बेरहमी से पीटा गया। मामला बिगड़ने पर इसी टीएसआई द्वारा ड्राइवर को ₹1 लाख की रिश्वत देकर चुप रहने का ऑफर दिया गया। क्या यह सरकारी विभाग है या उगाही का कोई सिंडिकेट?
₹1700 करोड़ का 'अवैध साम्राज्य'
एक तरफ सरकार कहती है कि भ्रष्टाचार खत्म करने के लिए 47 चेकपोस्ट बंद कर दिए गए, वहीं दूसरी ओर एक मीडिया हाउस में किए गए स्टिंग ऑपरेशन ने पोल खोल दी है। विभाग का सालाना खर्च ₹230 करोड़। अवैध वसूली सालाना लगभग ₹1700 करोड़! खिलतीपुर, नयागांव, सेंधवा और मुलताई जैसे बैरियरों पर ₹500 से ₹1000 प्रति गाड़ी की 'सेटिंग' खुलेआम वीडियो में कैद हुई है।
परिवहन आयुक्त उमेश जोगा: पद पर या लूप लाइन के करीब?
जब से उमेश जोगा ने परिवहन आयुक्त की कुर्सी संभाली है, तब से प्रदेश में लूट की वारदातें कम होने के बजाय कई गुना बढ़ गई हैं। हालांकि वे दावा करते हैं कि उन्होंने आईजी लेवल के अधिकारियों को कार्रवाई की छूट दी है, लेकिन धरातल पर हकीकत 'शून्य' है। क्या आयुक्त महोदय का अपने विभाग पर कंट्रोल खत्म हो चुका है? या फिर यह संगठित लूट ऊपर से नीचे तक एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा है?
अरुण कमांडो का 'सोशल मीडिया' प्रहार
सरकारी तंत्र के फेल होने के बाद अब अरुण कमांडो जैसे लोग सड़कों पर उतरकर इन लुटेरों का पर्दाफाश कर रहे हैं। फेसबुक पर लाइव आकर वे बैरियरों पर हो रही गुंडागर्दी को जनता के सामने ला रहे हैं, जिससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
मुख्यमंत्री जी, अब तो जागिए!
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के सुझाव पर चेकपोस्ट इसलिए बंद किए गए थे ताकि भ्रष्टाचार रुके। लेकिन आज मध्य प्रदेश की छवि अन्य राज्यों के यात्रियों के सामने 'डकैतों के प्रदेश' जैसी बन रही है। यदि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जल्द ही उमेश जोगा और उनके भ्रष्ट अमले पर सख्त चाबुक नहीं चलाया, तो इस ₹1700 करोड़ की कालिख से सरकार का चेहरा भी काला होने में देर नहीं लगेगी।

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