शिक्षक पात्रता परीक्षा के विरोध में पूर्व भाजपा विधायक ने अपनी ही सरकार को घेरा, दी आंदोलन की चेतावनी !
भोपाल।
25 साल से अधिक समय से प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षक के रूप में काम कर रहे शिक्षकों की सेवानिवृत्ति से पहले परीक्षा लेने के फैसले के विरोध में भाजपा के पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उधर, शिक्षक संगठनों की ओर से आज प्रदेशभर में प्रदर्शन कर कलेक्टरों को ज्ञापन सौंपा। राज्य कर्मचारी संघ द्वारा मुख्य सचिव को आदेश वापस लेने और सरकार की ओर से रिव्यू पिटीशन दायर करने का पत्र लिखने के बाद अब मप्र शासकीय शिक्षक संगठन के आह्वान पर प्रदेशभर में प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के दौरान मध्यप्रदेश सरकार से अन्य राज्यों की तरह सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग की गई है।
बीजेपी के पूर्व विधायक बोले- सरकार ने नहीं सुनी तो शिक्षकों के आंदोलन में साथ देंगे
सुसनेर से भाजपा के पूर्व विधायक मुरलीधर पाटीदार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह को लिखे पत्र में कहा है कि प्रदेश के शासकीय विद्यालयों में वर्षों से समर्पण भाव से अल्प वेतन पर शिक्षा दे रहे लाखों शिक्षक, जो शिक्षाकर्मी और संविदा शाला शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए थे, शिक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय से जारी पत्र के बाद प्रदेश का समग्र शिक्षक समाज हतप्रभ है कि इतने लंबे अनुभव और कार्यसिद्धि के बाद भी उन्हें शासकीय सेवा में स्वयं को फिर से साबित करना होगा। इस आदेश से भ्रम और व्यापक असंतोष की स्थिति बनी है। इससे शिक्षक समाज चिंतित और असुरक्षित महसूस कर रहा है तथा आंदोलन की ओर अग्रसर हो रहा है। पाटीदार ने मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री से आग्रह किया है कि इस मामले में संज्ञान लेते हुए संबंधित निर्देश को निरस्त किया जाए। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश और शिक्षा का अधिकार अधिनियम को ध्यान में रखते हुए शासन स्तर पर सकारात्मक पहल कर ऐसा मार्ग निकाला जाए, जिससे शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को किसी प्रकार की अपमानजनक प्रक्रिया से न गुजरना पड़े। आवश्यकता हो तो शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संशोधन भी किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस मामले में शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो शिक्षक समाज उग्र आंदोलन की ओर बढ़ेगा और वे स्वयं भी उनके आंदोलन का समर्थन करेंगे।

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