भोपाल (सबकी खबर)।
मध्य प्रदेश के स्कूली शिक्षा विभाग में भ्रष्टाचार की जो 'गंगा' बहने वाली थी, उस पर 'सबकी खबर' के एक बड़े खुलासे ने पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया है। प्रदेश के 116 'संदीपनी स्कूलों' के लिए किचन उपकरण और बर्तन खरीदी के नाम पर जनता के खून-पसीने की कमाई के ₹50 करोड़ से अधिक भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ने वाले थे, जिसे समय रहते बेनकाब कर दिया गया है। इस बड़े खुलासे के बाद लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) के आयुक्त अभिषेक सिंह (IAS) ने त्वरित और सख्त रुख अपनाते हुए टेंडर प्रक्रिया पर रोक लगा दी है और परचेजिंग कमेटी को दरों के पुनरीक्षण के आदेश दिए हैं।
क्या था मामला? ₹20 का सामान ₹100 में खरीदने की तैयारी
शिक्षा विभाग के अंतर्गत पाठ्य पुस्तक निगम के माध्यम से 116 संदीपनी स्कूलों के लिए किचन इक्विपमेंट (उपकरण) और बर्तनों की खरीदी का टेंडर निकाला गया था। टेंडर में बाजार दरों से 5 गुना तक अधिक कीमतें तय कर बड़ा खेल रचा जा चुका था। L1, L2, L3 फर्में तय हो चुकी थीं और 23 जून को टेंडर फाइनल कर सिर्फ ऑर्डर जारी होना बाकी था।
घोटाले की दरों की बानगी
बाजार में बेहतरीन क्वालिटी की मशीन ₹1.5 लाख से ₹2.5 लाख में उपलब्ध है, जबकि टेंडर में इसे ₹7.74 लाख में खरीदने का ऑर्डर था। (अकेले इसमें 8 करोड़ का घोटाला!)
बाजार दर ₹25,000–₹30,000; टेंडर रेट ₹1.77 लाख।
वर्किंग टेबल (खाना रखने वाली): बाजार दर ₹1,500–₹3,000; टेंडर रेट ₹67,000।
सिंगल बर्नर गैस रेंज: टेंडर रेट ₹67,530।
डबल सिंक यूनिट: टेंडर रेट ₹93,545।
देहरादून की एजेंसी से 'बड़ी सेटिंग', रसायन शास्त्र के प्रोफेसर को बनाया अध्यक्ष
खुलासे में सामने आया है कि इस पूरे खेल को अंजाम देने के लिए नियम-कायदों को ताक पर रख दिया गया। 
तकनीकी समिति का अजीब गणित
किचन उपकरण खरीदने वाली टेक्निकल कमेटी का अध्यक्ष रसायन विज्ञान (Chemistry) के एक प्रोफेसर को बनाया गया, जिन्हें डेपुटेशन पर लाया गया था।
देहरादून की आरव एंटरप्राइजेज (Aarav Enterprises) समेत दिल्ली और मेरठ की तीन फर्मों का एक सिंडिकेट बनाकर 90% से ज्यादा उपकरण आपूर्ति का काम एक ही एजेंसी को सौंपने की पूरी सेटिंग कर ली गई थी।
'सबकी खबर' का असर: आयुक्त ने खुद Google पर चेक किए रेट, लिया कड़ा एक्शन
सबकी खबर द्वारा खबर चलाए जाने के बाद स्कूली शिक्षा विभाग के आयुक्त अभिषेक सिंह ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया। आयुक्त ने स्वयं मोबाइल पर Google के जरिए मशीनों और बर्तनों की वास्तविक बाजार दरों को चेक किया। दरों में 5 गुना अंतर देखकर उन्होंने तुरंत परचेजिंग कमेटी की आपात बैठक बुलाई। आयुक्त अभिषेक सिंह ने आश्वस्त किया कि 29 प्रकार के किचन उपकरणों की टेंडर प्रक्रिया को निरस्त/री-टेंडर किया जा रहा है और बाजार दरों से मिलान के बिना कोई खरीदी नहीं होगी।
बर्तनों की खरीदी पर भी उठे सवाल, शिक्षा मंत्री की चुप्पी पर संदेहास्पद
उपकरणों के साथ-साथ बर्तनों की लिस्ट में भी भारी फर्जीवाड़ा सामने आया है। जहां ₹5 की चम्मच ₹25 में खरीदी जा रही थी। सबकी खबर ने सवाल उठाया कि जब किताबें समय पर न छाप पाने वाला पाठ्य पुस्तक निगम अब बर्तनों का टेंडर निकाल रहा है, तो शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह की नाक के नीचे यह सब कैसे चल रहा था? 
 

"मेरे कुर्सी पर रहते हुए शिक्षा विभाग में यह भ्रष्टाचार नहीं होने दूंगा। खबर से विभाग के करोड़ों रुपये बचे हैं।"
    — अभिषेक सिंह, आयुक्त (स्कूली शिक्षा विभाग, MP)