भोपाल। 
नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र को लेकर चल रहे विवाद में जांच प्रक्रिया अब निर्णायक चरण में पहुंच गई है। राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति के निर्देश पर सतना जिले के नागौद तहसील क्षेत्र के गांवों में सार्वजनिक सूचना जारी कर लोगों से इस मामले से जुड़े तथ्य और साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील की जा रही है। प्रशासन ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए डुगडुगी पिटवाकर ग्रामीणों को सूचना देने के साथ-साथ पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई है।
गांवों में सार्वजनिक मुनादी, लोगों से मांगी गई जानकारी
शुक्रवार को नागौद तहसील के ग्राम वसुधा में प्रशासनिक अमले ने डुगडुगी पिटवाकर ग्रामीणों को राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति की जांच की जानकारी दी। मुनादी के माध्यम से बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति के पास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी की जाति से संबंधित कोई दस्तावेज, अभिलेख या अन्य तथ्य उपलब्ध हों, तो वे उन्हें समिति के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं। प्रशासन के अनुसार शनिवार को ग्राम हरदुआ, मझोल और वसुधा में भी इसी प्रकार सार्वजनिक सूचना का प्रसार किया जाएगा। इसके लिए संबंधित राजस्व अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है।
सरकारी कार्यालयों में भी चस्पा किए गए नोटिस
जांच प्रक्रिया के तहत राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति द्वारा जारी इश्तहार की प्रतियां नागौद तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत कार्यालय तथा संबंधित ग्राम पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा की गई हैं। प्रशासन का उद्देश्य है कि जांच से जुड़ी सूचना अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे और यदि किसी के पास कोई महत्वपूर्ण जानकारी हो तो वह समिति को उपलब्ध कराई जा सके।

6 जुलाई को मंत्री को देना होगा जवाब
समिति ने राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी को नोटिस जारी कर 6 जुलाई 2026 को अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सतना कलेक्टर को नोटिस की विधिवत तामील सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए हैं, ताकि जांच प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ सके।

कांग्रेस नेता की याचिका से शुरू हुआ विवाद
यह पूरा मामला कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर याचिका के बाद सामने आया। याचिका में आरोप लगाया गया कि प्रतिमा बागरी ने अनुसूचित जाति प्रमाण-पत्र के आधार पर सतना जिले की आरक्षित रैगांव विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और बाद में मंत्री बनीं, जबकि बागरी समुदाय क्षेत्र में अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि प्रतिमा बागरी राजपूत/ठाकुर समुदाय से संबंधित हैं, इसलिए उनका एससी प्रमाण-पत्र वैध नहीं माना जा सकता।