मध्य प्रदेश: सोम ग्रुप को हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत, सरकार की सख्ती के बीच बढ़ीं मुश्किलें
भोपाल।
मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शराब कारोबारियों में शामिल सोम ग्रुप की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। राज्य सरकार की कार्रवाई, आबकारी विभाग के सख्त रुख और न्यायिक स्तर पर राहत नहीं मिलने के कारण समूह का कारोबार गंभीर संकट में नजर आ रहा है। शराब निर्माण लाइसेंसों के नवीनीकरण से लेकर नई निविदाओं में भागीदारी तक, लगभग हर मोर्चे पर कंपनी को झटका लगा है। जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश सरकार ने पहले ही सोम ग्रुप के शराब निर्माण संबंधी लाइसेंसों का नवीनीकरण नहीं किया था। इसके चलते समूह की रायसेन जिले के सलामतपुर-सेहतगंज क्षेत्र स्थित शराब निर्माण इकाई और मंडीदीप स्थित बीयर फैक्ट्री का संचालन प्रभावित हुआ। लाइसेंस रिन्यू न होने के कारण दोनों इकाइयों में उत्पादन लंबे समय से ठप बताया जा रहा है।
आबकारी नियमों के उल्लंघन का आरोप
सरकार का आरोप है कि समूह ने आबकारी नियमों का कई बार उल्लंघन किया। जांच के दौरान अवैध भंडारण, निर्धारित क्षमता से अधिक स्टॉक रखने और अन्य अनियमितताओं के मामले सामने आए। इन मामलों में विभाग ने कार्रवाई करते हुए जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद समूह के खिलाफ विभिन्न स्तरों पर जांच और कानूनी कार्रवाई जारी रही।
इसी बीच आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने 18 जून को 175 पृष्ठों का विस्तृत आदेश जारी किया। इस आदेश में विभाग ने सोम ग्रुप के खिलाफ दर्ज विभिन्न मामलों, नियमों के उल्लंघन और विभागीय कार्रवाई का विस्तृत उल्लेख करते हुए कंपनी को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया। आदेश में कहा गया कि उपलब्ध रिकॉर्ड और तथ्यों के आधार पर कंपनी को राहत देने का कोई औचित्य नहीं बनता।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली राहत
इसके बाद देसी मदिरा की आपूर्ति से जुड़े नए टेंडर में भी सोम ग्रुप की तकनीकी बोली (टेक्निकल बिड) निरस्त कर दी गई। कंपनी ने इस निर्णय को चुनौती देते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। मामले की सुनवाई प्रभारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति पृथ्वीराज मित्तल की खंडपीठ ने की। सुनवाई के दौरान सोम ग्रुप ने कई प्रकार की अंतरिम राहत की मांग की, लेकिन हाईकोर्ट ने तत्काल कोई राहत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने आबकारी आयुक्त के आदेश को चुनौती देने के लिए कंपनी को उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाने की सलाह दी। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि जब तक लाइसेंस संबंधी विवाद का समाधान नहीं हो जाता, तब तक कंपनी निविदा प्रक्रिया में भाग लेने का दावा नहीं कर सकती। लगातार मिल रहे इन झटकों के बाद सोम ग्रुप की व्यावसायिक स्थिति पर असर साफ दिखाई दे रहा है। शराब उत्पादन ठप होने, टेंडर प्रक्रिया से बाहर होने और न्यायालय से तत्काल राहत नहीं मिलने के कारण कंपनी के सामने आर्थिक और संचालन संबंधी चुनौतियां बढ़ गई हैं। फिलहाल मध्य प्रदेश सरकार, आबकारी विभाग और न्यायिक प्रक्रिया—तीनों स्तरों पर सोम ग्रुप को कोई बड़ी राहत नहीं मिली है। ऐसे में आने वाले समय में कंपनी की कानूनी रणनीति और सरकार के अगले कदम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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