भोपाल,सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों 'सबकी खबर' चैनल की एक रिपोर्ट ने वो भूचाल ला दिया है, जिसने मुख्यमंत्री निवास से लेकर पर्यावरण विभाग की चूलें हिला दी हैं। वरिष्ठ पत्रकार रवीन्द्र जैन की एक 'सुनी-सुनाई' का ऐसा अचूक असर हुआ है कि देखते ही देखते विभाग के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी (ACS) को हटा दिया गया और रसूखदार 'जीजा-साले' की जोड़ी का साम्राज्य ढहने की कगार पर पहुंच गया है। दरअसल, बीते 4 जून को सबकी खबर ने अपना एक लोकप्रिय कॉलम 'सुनी-सुनाई' में "एसीएस मेहरबान तो जीजा-साले पहलवान" शीर्षक से एक खबर चलाई थी। इस खबर का संज्ञान खुद सीएम हाउस ने लिया। इसके बाद 17 जून को हुए प्रशासनिक फेरबदल में पर्यावरण विभाग के तत्कालीन एसीएस अशोक वर्णवाल से उनका विभाग छीन लिया गया।
क्या था 'जीजा-साले' का पूरा खेल?
पूरा मामला पर्यावरण विभाग की तीन प्रमुख बॉडीज— प्रदूषण निवारण बोर्ड, एपको (EPCO) और 'सिया' से जुड़ा है।
जीजा (अचुत्यानंदन मिश्र): प्रदूषण निवारण बोर्ड के सदस्य सचिव हैं। रिटायरमेंट के तत्काल बाद इन्हें संविदा नियुक्ति मिल गई। विभाग में चर्चा है कि इनके बिना यहाँ पत्ता भी नहीं हिलता।
साले (आलोक नायक): एपको (EPCO) में चीफ साइंटिफिक ऑफिसर थे। ये इसी साल मई में रिटायर हुए थे।
नियमों को ताक पर रखकर मेहरबानी
जीजा (अचुत्यानंदन मिश्र) की संविदा नियुक्ति की फाइल तो मुख्यमंत्री की सहमति से पास हुई थी, लेकिन तत्कालीन एसीएस अशोक वर्णवाल ने अपनी खास 'केमिस्ट्री' के चलते साले साहब (आलोक नायक) को मुख्यमंत्री की बिना सहमति के ही संविदा नियुक्ति की खैरात बांट दी थी।
नए एसीएस अनिरुद्ध मुखर्जी का 'हंटर'
अशोक वर्णवाल को हटाकर जब अनिरुद्ध मुखर्जी को पर्यावरण विभाग का नया एसीएस बनाया गया, तो उन्होंने कड़ा रुख अख्तियार किया। पद संभालते ही उन्होंने सबसे पहला बड़ा एक्शन लेते हुए साले साहब (आलोक नायक) की संविदा नियुक्ति को तत्काल प्रभाव से रद्द कर उन्हें घर का रास्ता दिखा दिया है।
अब 'जीजाजी' पर लटकी तलवार, वसूली के लग रहे आरोप!
साले साहब की विदाई के बाद अब प्रदूषण निवारण बोर्ड के सदस्य सचिव और जीजाजी यानी अचुत्यानंदन मिश्र की कुर्सी पर भी तलवार लटक गई है। सूत्रों के मुताबिक, नए एसीएस अनिरुद्ध मुखर्जी अब उनके मामलों की भी सूक्ष्मता से जांच कर रहे हैं। चर्चाएं और शिकायतें यहाँ तक हैं कि जब से इन्हें संविदा नियुक्ति मिली है, प्रदेश के संभागीय प्रदूषण निवारण बोर्ड के दफ्तरों में 'वसूली' का खेल बढ़ गया है। ईमानदार अधिकारियों को हटाकर उनके 'यस मैन' (जी हुजूर करने वाले) लोगों को बिठाया गया है। उद्योगपतियों और पर्यावरणीय अनुमति (Environmental Clearance) चाहने वाले लोगों से ज्यादा पैसों की मांग की जा रही है। इसके अलावा, 237 अनुमतियों से जुड़े विवादित 'सिया' मामले और एनजीटी (NGT) के आदेशों को ठेंगा दिखाने के मामले में भी उंगलियां उठ रही हैं। फिलहाल, नए एसीएस अनिरुद्ध मुखर्जी के आने से पूरे पर्यावरण विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। अब देखना यह है कि जांच की आंच में झुलस रहे 'जीजाजी' अचुत्यानंदन मिश्र की कुर्सी कितने दिन और सुरक्षित रह पाती है!