भोपाल,सबकी खबर। 
मध्य प्रदेश भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पद संभाले लगभग एक साल पूरा  होने वाला है। बाहर से बेहद शांत और 'कॉमन मैन' दिखने वाले खंडेलवाल के इस एक साल के कार्यकाल में संगठन के भीतर बड़े और कड़े बदलाव देखने को मिले हैं। सबकी खबर के साथ एक बेबाक इंटरव्यू में खंडेलवाल ने संगठन, मंत्रियों पर नकेल, राज्यसभा चुनाव की अंदरूनी कहानी और राज्य में 'ऑपरेशन लोटस 2' की संभावनाओं पर बेहद बेबाकी से जवाब दिए हैं।
राज्यसभा में कांग्रेस की 'सीट चोरी' पर बड़ा खुलासा
राज्यसभा चुनाव में भाजपा द्वारा तीसरी सीट जीतने पर जब कांग्रेस ने 'सीट चोरी' का आरोप लगाया, तो खंडेलवाल ने कड़ा पलटवार किया। उन्होंने कहा: "विनाश काले विपरीत बुद्धि। तीसरी सीट का हमारा कोई विचार नहीं था, लेकिन कांग्रेस प्रत्याशी के फॉर्म में बड़ी चूक थी। हमें ठीक सुबह 11 बजे किसी ने इस कमी के बारे में बताया, जिसके बाद हमने अचानक अलर्ट होकर आपत्ति दर्ज कराई। जब विरोधी दल को आपकी कमजोरी का पता चलेगा, तो वह लाभ उठाएगा ही। इसमें हम दोषी नहीं, बल्कि कांग्रेस खुद दोषी है।" उन्होंने आगे चुटकी लेते हुए कहा कि कांग्रेस के 64 विधायकों में से 25-26 विधायक उनके साथ जाने को तैयार ही नहीं थे, जिससे साफ है कि कांग्रेस को अपने ही नेतृत्व पर भरोसा नहीं है।
क्या मध्य प्रदेश में होने जा रहा है 'ऑपरेशन लोटस 2'?
जब खंडेलवाल से पूछा गया कि पूर्व अध्यक्ष वी.डी. शर्मा के समय बड़ी टूट हुई थी, तो क्या अब आपके कार्यकाल में कांग्रेस के बचे हुए 25 असंतुष्ट विधायकों के साथ 'ऑपरेशन लोटस 2' होने जा रहा है? इस पर उन्होंने इंकार न करते हुए बेहद रणनीतिक जवाब दिया: "राजनीति में कभी भी किसी भी संभावना से कोई इंकार नहीं करता। यह तो भविष्य बताएगा कि वक्त की क्या जरूरत है। चुनाव में जीत के लिए हमें जो भी कदम उठाने होंगे, हम उठाएंगे।"
अनुशासनहीन नेताओं के लिए आ रही है 'अनुशासन समिति'
सागर में भूपेंद्र सिंह बनाम गोविंद राजपूत विवाद और प्रीतम लोधी के बयानों जैसी अंदरूनी गुटबाजी पर कड़ा रुख अख्तियार करते हुए प्रदेश अध्यक्ष ने बड़ा ऐलान किया। उन्होंने साफ कहा कि भाजपा अब एक 'अनुशासन समिति' बनाने जा रही है, जिसमें वरिष्ठ नेताओं को रखा जाएगा। जो नेता तय प्लेटफॉर्म के बाहर बयानबाजी करेंगे, यह समिति उन पर सीधी और उचित कार्रवाई करेगी।
"यह पद मुझे मिला है, मेरे परिवार को नहीं"
मंत्रियों को प्रदेश कार्यालय में अनिवार्य रूप से बैठने के आदेश पर उन्होंने कहा कि बल्लभ भवन (मंत्रालय) न पहुंच पाने वाले आम कार्यकर्ताओं के लिए मुख्यमंत्री मोहन यादव से चर्चा कर यह रास्ता निकाला गया है। वहीं, अध्यक्ष बनने के बाद भी सरकारी बंगले और गाड़ियों का मोह छोड़ने के सवाल पर खंडेलवाल ने कहा, "यह पद मुझे मिला है, मेरे परिवार को नहीं। परिवार का इस पर कोई हक नहीं है। आर्थिक रूप से मुझे किसी सरकारी साधन की जरूरत नहीं है, तो मैं सरकार पर बोझ क्यों बनूं? पद के पहले भी जीवन था और पद के बाद भी रहेगा।"
मुख्यमंत्री पर लगे आरोपों पर संगठन क्यों आया आगे?
अखबारों और कांग्रेस द्वारा मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगाए गए व्यक्तिगत आरोपों का जवाब खुद मुख्यमंत्री के बजाय संगठन द्वारा दिए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन एक-दूसरे के पूरक हैं। आरोपों में कोई दम या वजनदारी नहीं थी, इसलिए मुख्यमंत्री का खुद सामने आना जरूरी नहीं था। तथ्यहीन आरोपों का खंडन संगठन और मंत्रियों ने पूरी ताकत से कर दिया है।
अगले एक साल का रोडमैप
हेमंत खंडेलवाल ने अपनी भविष्य की रणनीति का खुलासा करते हुए बताया कि अगले एक साल में: स्थानीय स्तर पर भी विधायकों, सांसदों और मंत्रियों को स्थानीय भाजपा कार्यालयों में बैठकर कार्यकर्ताओं से तालमेल बिठाना अनिवार्य होगा।
प्रभारी मंत्री हर दो महीने में कोर टीम की बैठक करेंगे
कमजोर बूथों और विधानसभाओं को मजबूत करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप बनाकर हर वर्ग को भाजपा से जोड़ा जाएगा। साफ है कि मध्य प्रदेश भाजपा में 'सॉफ्ट' दिखने वाले हेमंत खंडेलवाल अंदरूनी तौर पर संगठन को बेहद कड़े और अनुशासित ढंग से चला रहे हैं, और आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए मुश्किलें और बढ़ने वाली हैं।