भोपाल। 
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि प्रकृति ने हमें जो दिया है, वह हमारी बपौती नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विश्वास के रूप में सौंपा गया है। इसलिए हमारा दायित्व है कि हम पृथ्वी को जिस स्वरूप में पाए हैं, उससे बेहतर स्थिति में भविष्य की पीढ़ियों के लिए तैयार करें। सिंधिया शनिवार को जिले के कंजा गांव में कूनो नदी के उद्गम स्थल पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। यहां उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर चलाए जा रहे ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत 700 पौधों का रोपण किया।
जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का आह्वान
इस दौरान सिंधिया ने ‘जल गंगा संवर्धन अभियान–जन संरक्षण का जन आंदोलन’ की शुरुआत भी की। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण और जल संवर्धन केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी से ही सफल हो सकता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नदियों को देवी स्वरूप माना गया है। गंगा, यमुना, नर्मदा और कावेरी जैसी नदियां केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि जीवन का आधार हैं। यही हमारी प्राचीन सभ्यता की सबसे बड़ी सोच है कि जल है, तभी जीवन है।
महात्मा गांधी के विचारों का किया उल्लेख
सिंधिया ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए कहा कि पृथ्वी मां के पास हर व्यक्ति की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संसाधन हैं, लेकिन लालच पूरा करने के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण की रक्षा शहरों से ज्यादा गांवों से होगी, क्योंकि गांव ही प्रकृति के सबसे करीब हैं।
खुटियावद में सोलर प्लांट का उद्घाटन
कार्यक्रम के बाद सिंधिया ने खुटियावद में 20 करोड़ रुपए की लागत से बने सनगार्नर सोलर प्लांट का उद्घाटन भी किया। इस प्लांट की क्षमता 4.5 मेगावाट है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा भविष्य की जरूरत है और इससे पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी।
हर नागरिक निभाए अपनी जिम्मेदारी
सिंधिया ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण केवल एक अभियान नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारी जिम्मेदारी है। जल, जंगल और जमीन का संरक्षण तभी संभव है, जब हर नागरिक पौधारोपण और जल स्रोतों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाए।