हाईकोर्ट से झटका, अब सुप्रीम कोर्ट जाएंगे उमंग सिंघार; बीना विधायक निर्मला सप्रे के दलबदल का मामला गरमाया
भोपाल।
सागर के बीना से विधायक निर्मला सप्रे के कथित दलबदल मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। हाईकोर्ट ने स्पीकर को निर्णय लेने का निर्देश देने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी है। कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार को बचाने के लिए स्पीकर ने दलबदल याचिका पर महीनों से फैसला लंबित रखा है। अब कांग्रेस इस पूरे मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जल्द विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दायर करेगी।
हाईकोर्ट ने कहा- मामला स्पीकर के पास पेंडिंग
हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष मामला लंबित है और न्यायालय इस स्तर पर हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इसके बाद याचिका खारिज कर दी गई। अब कांग्रेस इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाने की तैयारी कर रही है। उमंग सिंघार का कहना है कि दलबदल कानून का उद्देश्य राजनीतिक दलों की स्थिरता बनाए रखना है, लेकिन इस मामले में जानबूझकर फैसला टालकर कानून की भावना को कमजोर किया जा रहा है। उनका आरोप है कि विधानसभा अध्यक्ष की निष्क्रियता से भाजपा को राजनीतिक लाभ मिल रहा है।
निर्मला सप्रे सार्वजनिक रूप से भाजपा के कार्यक्रमों में नजर आई थीं
लोकसभा चुनाव के दौरान बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे सार्वजनिक रूप से भाजपा के कार्यक्रमों में नजर आई थीं। उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ मंच साझा किया था और भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। इसके बाद कांग्रेस ने इसे दल-बदल मानते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग उठाई।
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष दसवीं अनुसूची के तहत याचिका दायर कर कहा कि निर्मला सप्रे ने स्वेच्छा से कांग्रेस की सदस्यता छोड़ने जैसा आचरण किया है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कांग्रेस ने तर्क दिया कि दलबदल केवल औपचारिक इस्तीफे से नहीं, बल्कि सदस्य के आचरण और राजनीतिक गतिविधियों से भी साबित हो सकता है।
स्पीकर के सामने क्या स्थिति है?
कांग्रेस की दलबदल याचिका लंबे समय से विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित है। कांग्रेस लगातार आरोप लगाती रही है कि जानबूझकर इस मामले में फैसला नहीं लिया जा रहा। इसी देरी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी ताकि अदालत स्पीकर को समयबद्ध निर्णय का निर्देश दे।
हाईकोर्ट ने क्या कहा?
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कहा कि जब मामला विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विचाराधीन है, तब अदालत इस चरण में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। अदालत ने स्पीकर को निर्देश जारी करने से इनकार करते हुए याचिका खारिज कर दी।

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