भोपाल। 
मप्र की सड़कों पर हिट एंड रन यानी टक्कर मारकर भागने के मामलों में मप्र देश में दूसरे नंबर पर पहुंच गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन हादसों में एक साल में 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हुई है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की 2024 रिपोर्ट में सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में 2024 के दौरान हिट एंड रन के 9,260 केस दर्ज किए गए। इनमें 10,130 लोगों ने जान गंवाई। इस सूची में केवल उत्तर प्रदेश ही मप्र से आगे है, जहां 18,536 मामले दर्ज हुए, जिनमें 19,641 मौतें हुईं। मप्र के बाद महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे बड़े राज्य काफी पीछे हैं।
19,658 मामले लापरवाही से वाहन चलाने के
एनसीआरबी की हालिया रिपोर्ट कहती है कि मप्र में रैश ड्राइविंग (तेज और लापरवाही से वाहन चलाने) के 19,658 मामले दर्ज हुए। इन मामलों में 20,653 लोग किसी न किसी तरह हादसों का शिकार हुए। देशभर में दर्ज कुल 1.93 लाख मामलों में से करीब हर 10वां मामला मप्र से सामने आया है। ट्रैफिक एक्सपर्ट्स मानते हैं कि हाईवे पर ओवरस्पीडिंग, शहरों में नियमों की अनदेखी, हेलमेट-सीट बेल्ट को लेकर ढील और कमजोर मॉनिटरिंग इसकी मुख्य वजह है। दूसरे हादसों में भी 5 हजार से ज्यादा मौतें: हिट एंड रन के अलावा अन्य सड़क हादसों में भी मप्र की स्थिति गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में अन्य सड़क दुर्घटनाओं की श्रेणी में 4,682 केस दर्ज किए गए, जिनमें 5,310 लोगों की मौत हुई। 20 हजार की जान जोखिम में डाली: दूसरों की जान जोखिम में डालकर घायल करने के भी 20,307 मामले दर्ज हुए हैं। इनमें 22 हजार से ज्यादा लोग जख्मी या प्रभावित हुए। घायलों के आंकड़ों में मप्र देश के सबसे प्रभावित राज्यों में शामिल है।
मौतों के आंकडे
रिपोर्ट के मुताबिक केवल हिट एंड रन मामलों में मप्र में 2024 के दौरान 10,130 लोगों की मौत हुई। यानी प्रदेश में रोजाना औसतन करीब 27 लोगों ने सड़क पर दम तोड़ा। इसका समयवार औसत निकालें तो हर घंटे एक से ज्यादा व्यक्ति की जान सड़क हादसों में जाने के आंकड़े सामने आते हैं।
कमजोर निगरानी वजह
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मप्र में हादसों की बड़ी वजह ओवरस्पीडिंग, हाईवे पर कमजोर निगरानी, ड्राइविंग लाइसेंस प्रक्रिया में खामियां और ट्रैफिक नियमों के पालन में ढिलाई हैं। इसलिए केवल चालान काटने से हालात नहीं सुधरेंगे, बल्कि रोड इंजीनियरिंग, इमरजेंसी रिस्पॉन्स और ड्राइवर बिहेवियर सुधार पर एक साथ काम करना होगा।