साहब, फेफड़े कैसे होंगे साफ? NCAP के करोड़ों खा गई नगर निगम की 'सफाई और सुंदरीकरण' की भूख!
भोपाल।
झीलों के शहर भोपाल की फिजा में घुले जहर को कम करने के लिए केंद्र सरकार ने करोड़ों रुपये का बजट भेजा, लेकिन भोपाल नगर निगम (BMC) ने इसे ऐसी जगहों पर लगा दिया जिनका प्रदूषण से सीधा वास्ता ही नहीं है। नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (NCAP) के तहत मिले फंड के 'दुरुपयोग' पर अब भोपाल सिटीजंस फोरम और BMC के बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में ठन गई है।
क्या है पूरा मामला?
भोपाल उन 'नॉन-अटेनमेंट' शहरों में शामिल है जहां पिछले 5 सालों से हवा की क्वालिटी नेशनल स्टैंडर्ड से नीचे है। प्रदूषण रोकने के लिए NCAP फंड दिया गया था। जब NGT ने खर्चे का हिसाब मांगा, तो निगम की रिपोर्ट देख सब हैरान रह गए।
निगम की दलील
नगर निगम का कहना है कि उन्होंने कचरा कलेक्शन स्टेशन बनाए, आदमपुर डंप साइट पर पुराने कचरे का निपटारा किया और कचरे के बैग खरीदे। निगम के मुताबिक ये काम सीधे नहीं तो 'अप्रत्यक्ष' रूप से प्रदूषण कम करने में मदद करते हैं।
फोरम के वकील ने उड़ाई धज्जियां
सिटीजंस फोरम के वकील हरप्रीत सिंह गुप्ता ने कोर्ट में निगम की रिपोर्ट की धज्जियां उड़ाते हुए कहा कि ;गार्डन की मरम्मत करना या कचरा बैग खरीदना NCAP के नियमों के खिलाफ है। ये पैसे हवा साफ करने के लिए थे, न कि निगम के रोजमर्रा के साफ-सफाई के कामों के लिए। फंड को उन कामों में बर्बाद किया गया जिनका एयर क्वालिटी से कोई लेना-देना नहीं है।'
BMC का पल्ला झाड़ने वाला अंदाज
हैरानी की बात यह है कि निगम ने अपनी रिपोर्ट में यह तक कह दिया कि उसका मुख्य काम तो केवल सफाई और कचरा प्रबंधन है। प्रदूषण कम करना एक मल्टी-सेक्टर काम है, यानी निगम केवल अपनी हद तक ही जिम्मेदार है। अब सबकी नजरें NGT के अगले कदम पर हैं। क्या साफ हवा के नाम पर हुए इस कथित फिजूलखर्ची पर कोर्ट निगम पर डंडा चलाएगा?

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