भोपाल। 
मध्य प्रदेश पुलिस महकमे में उस वक्त हड़कंप मच गया जब सबकी खबर ने अमृत लाल मीणा की पूरी 'कुंडली' सार्वजनिक कर दी। दावों के मुताबिक, जिस वर्दी पर जनता भरोसा करती है, उसे हासिल करने के लिए कथित तौर पर 'फर्जीवाड़े' का सहारा लिया गया। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा अधिकारी के सगे भाई को लेकर हुआ है। दस्तावेज कहते हैं: अमृत लाल मीणा के सगे छोटे भाई गौरव मीणा (वाणिज्यिक कर विभाग में सहायक आयुक्त) सरकारी रिकॉर्ड में OBC श्रेणी में दर्ज हैं। जब माता-पिता एक हैं, घर एक है और मूल निवास एक है, तो बड़ा भाई ST और छोटा भाई OBC कैसे हो गया? 1992 में अमृत लाल मीणा ने गुना के चाचौड़ा स्कूल से OBC कोटे के तहत ₹268.50 की छात्रवृत्ति ली थी। रिकॉर्ड के अनुसार, जो व्यक्ति 1991 में ST होने का दावा कर रहा है, उसने 1992 में OBC का लाभ क्यों लिया? विदिशा जिले की लटेरी तहसील (जहाँ से ST सर्टिफिकेट बना बताया गया) के तहसीलदार ने मार्च 2026 की ताजा रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि उनके रिकॉर्ड में अमृत लाल मीणा के नाम का कोई भी प्रमाण पत्र जारी नहीं हुआ है। पुलिस मुख्यालय (PHQ) की जांच और राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने इस प्रमाण पत्र को 'शून्य' और 'अमान्य' घोषित कर दिया है। समिति के अनुसार, मीणा मूलतः गुना के निवासी हैं, जबकि ST का लाभ केवल सिरोंज-लटेरी क्षेत्र के मीणाओं को मिलता है। इतने गंभीर आरोपों और दस्तावेजों के बावजूद, अमृत लाल मीणा 1998 बैच की DPC (विभागीय पदोन्नति समिति) के जरिए आईपीएस बनने की दौड़ में शामिल हैं।इस खुलासे ने मध्य प्रदेश की प्रशासनिक और पुलिस व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। क्या राज्य सरकार एक 'फर्जी' घोषित हो चुके प्रमाण पत्र वाले अधिकारी को IPS पद पर प्रमोट करेगी? अब तक इस मामले में FIR दर्ज कर अधिकारी को जेल क्यों नहीं भेजा गया?
सालों से ली गई अवैध तनख्वाह की वसूली कब होगी?
यह मामला सिर्फ एक सर्टिफिकेट का नहीं, बल्कि उन हजारों योग्य उम्मीदवारों के हक की चोरी का है जिन्होंने ईमानदारी से मेहनत की। अब गेंद मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के पाले में है—क्या वे 'फर्जीवाड़े' पर प्रहार करेंगे या खाकी के रसूख के आगे फाइलें दबा दी जाएंगी?