गेहूं खरीदी में 'लेट-लतीफी' पर भाजपा में ही बगावत? विधायक चिंतामणि मालवीय ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र, गिनाईं किसानों की मुश्किलें
भोपाल।
एमपी में गेहूं खरीदी में देरी पर जहां किसानों का आक्रोश उभर रहा है वहीं सियासत भी गरमा रही है। हाल ये है कि विपक्षी दल कांग्रेस के बाद अब सत्ताधारी भाजपा के विधायक भी इस मुद्दे पर मुखर हो रहे हैं। स्थानीय किसानों के दबाव के बाद गेहूं खरीदी में लेट-लतीफी पर भाजपा विधायक डॉ. चिंतामणि मालवीय MLA Chintamani Malviya ने भी मोर्चा खोला है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को खुला पत्र लिख दिया है। डॉ. चिंतामणि मालवीय ने अपने पत्र में प्रदेश के किसानों की कर्ज-ब्याज माफी की मांग की है। उन्होंने गेहूं खरीदी जल्द शुरु करने को कहा है।
मप्र में समर्थन मूल्य पर की जाने वाली गेहूं खरीदी में काफी विलंब हो चुका है। सबसे पहले खरीदी 1 फरवरी से शुरू की जानी थी, जिसे बढ़ाकर 16 मार्च, फिर 1 अप्रेल और अब 10 अप्रेल कर दिया है। खरीदी की ये तारीखें भोपाल, नर्मदापुरम, इंदौर व उज्जैन संभाग के जिलों की है। बाकी के संभागों में तो और बाद में खरीदी की जानी है। किसान इस बात से नाराज है और विभिन्न माध्यमों पर नाराजगी दर्ज करवा रहे हैं।
जनप्रतिनिधियों पर किसानों का दबाव
गेहूं खरीदी में देरी के कारण दोनों ही दलों के जनप्रतिनिधि, विधायकों को स्थानीय किसानों की नाराजगी का सामना कर रहे हैं। किसान इन जनप्रतिनिधियों को घेरने की तैयारी है। ज्यादातर किसान गेहूं की कटाई और थ्रेसिंग कर चुके हैं, उनकी उपज की बड़ी मात्रा खलिहानों व खुले में है, जिसके बारिश के कारण खराब होने का खतरा बना हुआ है। खुले बाजार में दाम कम है। प्रति क्विंटल 500 से 700 रुपए का नुकसान हो रहा है। जब खरीदी शुरू हो जाती है तो दामों में ज्यादा गिरावट नहीं होती। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों को 31 मार्च तक कर्ज नहीं भर पाए। अब ब्याज लग रहा है। सरकार ने कर्ज जमा करने की अवधि भी नहीं बढ़ाई।

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