एमपी में 'मोहन' का हंटर: हर 46 दिन में नपा एक बड़ा अफसर, सवा दो साल में 18 IAS-IPS पर गिरी गाज
भोपाल।
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की प्रशासनिक सख्ती ने एक बार फिर ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप मचा दिया है। हाल ही में गुना एसपी अंकित सोनी और सीधी कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी को उनके पदों से हटाकर मुख्यमंत्री ने यह साफ कर दिया है कि गंभीर लापरवाही और जनता के प्रति उदासीनता पर सरकार किसी भी स्तर पर ढील देने के मूड में नहीं है। गुना एसपी पर जहां मातहतों द्वारा की गई कथित लूट और रिश्वत के मामले में कार्रवाई न करने के आरोप थे, वहीं सीधी कलेक्टर को जनप्रतिनिधियों की शिकायतों और समय पर दफ्तर न बैठने के चलते हटाया गया है। मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से डॉ. यादव का यह कड़ा तेवर निरंतर बना हुआ है। आंकड़ों पर नजर डालें तो उनके सवा दो साल के कार्यकाल में औसतन हर 46 दिन में एक आईएएस या आईपीएस अधिकारी पर गाज गिरी है। अब तक 10 कलेक्टर और 8 एसपी सहित कुल 18 वरिष्ठ अधिकारियों को लापरवाही, भ्रष्टाचार या प्रशासनिक चूक के चलते कार्रवाई का सामना करना पड़ा है। इसमें अशोकनगर कलेक्टर को रिश्वतकांड के बाद हटाना हो, इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद निगमायुक्त पर कार्रवाई हो या फिर मऊगंज के गड़रा हत्याकांड के बाद कलेक्टर-एसपी को बदलना—इन सभी फैसलों ने यह संदेश दिया है कि डॉ. मोहन यादव की सरकार में सीधी भर्ती के बड़े अधिकारियों के लिए भी 'जीरो टॉलरेंस' की नीति लागू है। मुख्यमंत्री का यह 'क्विक एक्शन' न केवल प्रशासनिक ढर्रे को सुधारने की कोशिश है, बल्कि यह उन अफसरों के लिए भी एक बड़ी चेतावनी है जो खुद को नियमों से ऊपर समझते हैं। इस प्रशासनिक सर्जरी से यह स्पष्ट है कि प्रदेश में अब केवल वही अधिकारी टिक पाएंगे जो जनता और सरकार के प्रति जवाबदेह होंगे।

भारत की GDP ग्रोथ पर नजर, पश्चिम एशिया तनाव से कितना असर?
बार-बार प्यास और पेशाब आना, डायबिटीज का संकेत
एस्टेट विभाग का नोटिस: भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 24 अकबर रोड 28 मार्च तक खाली करने का आदेश
सुबह की एक गलती बन सकती है हार्ट अटैक की वजह
नवरात्रि में मखाना खाने से मिलती है लंबे समय तक ऊर्जा