एमपी में बाघों पर 'हाई वोल्टेज' खतरा: 15 महीनों में 64 की मौत, करंट बना सबसे बड़ा दुश्मन
भोपाल।
प्रदेश में बाघों की मौत के मामले चिंता बढ़ा रहे हैं। पिछले 15 महीनों में प्रदेश में 64 बाघों की मौतें दर्ज की गई है, इनमें से 16 की मौत करंट लगने से हुई है। यह स्थिति बाघ के जंगलों से निकलकर गांवों और खेतों की ओर बढ़ने से पैदा हुई है। कई इलाकों में किसान जंगली जानवरों से फसल बचाने के लिए खेतों के चारों ओर तारों में बिजली का करंट दौड़ा देते हैं। यही करंट बाघों के लिए घातक साबित हो रहा है। मंडला और जबलपुर संभाग में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां करंट लगने से बाघों की मौत हुई।
आपसी संघर्ष और अन्य कारण भी जिम्मेदार
वन विभाग के अनुसार करंट से मौतों के अलावा कुछ मामलों में बाघों की मौत आपसी संघर्ष या प्राकृतिक कारणों से भी हुई है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में जनवरी के दौरान आपसी लड़ाई में बाघों की मौत के मामले सामने आए हैं, जबकि अन्य वन क्षेत्रों में भी अलग-अलग कारणों से बाघों की जान गई।
पिछले साल भी सामने आए थे कई मामले
वर्ष 2025 में भी प्रदेश में 53 से अधिक बाघों की मौत दर्ज की गई थी। इनमें कई मौतें करंट लगने के कारण हुई थीं, जो वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि भोजन और पानी की तलाश में बाघों का जंगल से बाहर निकलना बढ़ रहा है। यही कारण है कि वे रिहायशी इलाकों और खेतों तक पहुंच रहे हैं, जहां मानव गतिविधियों के कारण उनके लिए खतरे बढ़ जाते हैं।
वन विभाग के सामने बड़ी चुनौती
बढ़ती घटनाओं के बीच वन विभाग के सामने बाघों की सुरक्षा सुनिश्चित करना बड़ी चुनौती बन गया है। अधिकारियों का कहना है कि अवैध करंट लगाने पर सख्ती और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।

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