भोपाल। 
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने बुधवार को प्रदेश की अदालतों की सुरक्षा व्यवस्था पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 31 मार्च तक विस्तृत रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने सुरक्षा व्यवस्था पर कड़ी टिप्पणी की। मामले में हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से अधिवक्ता बीएन मिश्रा, जजेस एसोसिएशन की ओर से सीनियर एडवोकेट केसी घिल्डियाल और राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता अनुभव जैन उपस्थित रहे।
हाल की घटनाओं पर कोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि कहीं कोर्ट की दीवार गिरने से जज घायल हो रहे हैं और कहीं परिसर में बम फूट रहे हैं। अदालत ने पूछा कि सरकार इस मुद्दे पर गंभीर क्यों नहीं है।
29 जिला न्यायालयों में चहारदीवारी नहीं
हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार नरेश एम. सिंह की रिपोर्ट में बताया गया कि प्रदेश के 29 जिला न्यायालयों में चहारदीवारी नहीं है।
27 तहसील कोर्ट में बाउंड्री वॉल छोटी
रिपोर्ट के अनुसार 27 तहसील न्यायालयों में बाउंड्री वॉल की ऊंचाई बेहद कम पाई गई है। प्रदेश के केवल 5 जिला अदालत परिसरों में ही पुलिस चौकी की व्यवस्था है।
28 जिलों में जज और परिवार असुरक्षित
रिपोर्ट में 28 जिलों में जजों और उनके परिवार की सुरक्षा व्यवस्था नाकाफी बताई गई है। राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि जहां कोर्ट परिसरों में दीवार नहीं थी, वहां निर्माण कराया गया है और जहां ऊंचाई कम थी, उसे बढ़ाया गया है।
जजों की सुरक्षा पर 2016 से जारी सुनवाई
जजों की सुरक्षा को लेकर हाईकोर्ट ने 2016 में स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की थी, जो अब भी जारी है।