एमपी में अफसरों का 'अपना गांव': भोपाल के पास 50 आईएएस अधिकारियों ने खरीदी जमीन, जांच के लिए सीएम को लिखा पत्र !
भोपाल, सबकी खबर।
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब यह खुलासा हुआ कि प्रदेश के 50 आईएएस (IAS) अधिकारियों ने भोपाल के कोलार रोड स्थित गुरडिया गांव में एक साथ जमीनें खरीदी हैं। इस मामले को लेकर अब भ्रष्टाचार के आरोप लगने शुरू हो गए हैं।
क्या है पूरा मामला ?
मध्य प्रदेश के एक रिटायर्ड आईएफएस (IFS) अधिकारी आजाद सिंह डबास ने इस संबंध में मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक पत्र लिखा है। डबास का आरोप है कि एक ही स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जमीन खरीदना सामान्य निवेश नहीं है। उन्होंने आशंका जताई है कि या तो अधिकारियों को वहां आने वाली किसी भावी सरकारी योजना की जानकारी है, या यह काले धन को खपाने का एक तरीका है। डबास ने मांग की है कि हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र आयोग का गठन किया जाए, जो प्रदेश के आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की संपत्ति के ब्यौरे का मूल्यांकन करे। चर्चा के दौरान रिटायर्ड अधिकारी ने कहा कि प्रदेश के अधिकारी हर साल अपनी संपत्ति का जो रिटर्न फाइल करते हैं, सरकार उसकी कभी जमीनी जांच नहीं करती। सिर्फ कागजी खानापूर्ति होती है। आरोप लगाया गया है कि अधिकारी अपनी अवैध कमाई को वैध दिखाने के लिए पत्नियों के ब्यूटी पार्लर, कृषि आय और विरासत में मिली संपत्ति का सहारा लेते हैं। डबास ने कहा कि प्रदेश पर बढ़ रहे 5 लाख करोड़ रुपये के कर्ज के लिए अधिकारियों का भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना अधिकारियों की मिलीभगत के राजनेता भ्रष्टाचार नहीं कर सकते।
अधिकारियों का पक्ष
हालांकि, कुछ अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने कानून के दायरे में रहकर अपनी वैध कमाई से जमीनें खरीदी हैं और इसकी जानकारी सरकार को दे दी गई है। लेकिन डबास का कहना है कि कई अधिकारी अपनी संपत्ति की बाजार कीमत को बहुत कम करके दिखाते हैं, जिसकी जांच जरूरी है।

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