भोपाल।
BJP में जिसका जितना बड़ा कद और पद, उससे उतनी ही अधिक सहयोग निधि और चंदा लिया जा रहा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि से प्रारंभ हुआ पार्टी का आजीवन सहयोग निधि अभियान अंतिम चरण में है। इस दौरान प्रदेश में और खासतौर से राजधानी में नेताओं-मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों से भी चंदा लिया गया है। सारी राशि चेक के माध्यम से ली गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार विधायकों और महापौर से करीब 5-5 लाख चंदा लिया जा रहा है। पार्टी ने इस साल प्रदेश से 50 करोड़ रुपए सहयोग निधि का लक्ष्य रखा था।
भारतीय जनता पार्टी के आजीवन सहयोग निधि अभियान में सत्ता से लेकर संगठन तक नेताओं, जनप्रतिनिधियों और पदाधिकारियों से चंदा लिया जा रहा है। इसमें जो निधि संग्रह की जा रही है, उसमें कद और पद के हिसाब से चंदा लिया जाएगा। पार्टी सूत्रों के अनुसार भोपाल में करीब डेढ़ करोड़ रुपए लक्ष्य तय किया था। इसमें वरिष्ठ पदाधिकारियों और पदों पर बैठे नेताओं से 50 हजार से 5 लाख रुपए तक चंदा लिया जा रहा है। इसके अलावा यदि कोई और अधिक राशि देना चाहे तो स्वेच्छा से दे सकता है। बता दें कि मंत्रियों से ली जाने वाली इस राशि से कहीं अधिक है। विधायकों और महापौर से भी 5-5 लाख चंदा की बात सामने आई है।
11 फरवरी से चल रहा अभियान
बता दें कि बीते 11 फरवरी पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की पुण्यतिथि से भाजपा ने आजीवन सहयोग निधि अभियान प्रारंभ किया था। यह 28 फरवरी तक चलना है। इसमें सामान्यता: कम से कम एक हजार रुपए से लेकर अधिक से अधिक सहयोग निधि ली जा रही है। हालांकि इसमें स्वेच्छा से चंदा लिया जा रहा है। जो संपन्न और समर्थ हैं, उनसे अधिक की अपेक्षा रखी गई है। पार्टी के नगर अध्यक्ष और प्रमुख पदाधिकारियों सहित युवा मोर्चा में जिलाध्यक्ष के दावेदारों से भी ज्यादा से ज्यादा राशि के लिए कहा गया है।
निगम पार्षदों से भी सहयोग राशि
पार्टी पदाधिकारियों से मिली जानकारी अनुसार नगर निगम में महापौर क अलावा मेयर इन काउंसिल और पार्षदों से भी आजीवन सहयोग निधि ली जाएगी। सूत्रों के अनुसार भाजपा पार्षदों से 51—51 हजार रुपए की अपेक्षा की गई है।
चेक या डिजिटली रूप से चंदा लेगी

बता दें कि पार्टी ने साल 2026 में आजीवन सहयोग निधि के रूप में प्रदेश से 50 करोड़ रुपए एकत्रित करने का लक्ष्य रखा था। बीते साल यह करीब 25 करोड़ से कुछ अधिक था। इस दफा पारदर्शिता रखने के लिए पार्टी ने केवल चेक या डिजिटल पैमेंट का विकल्प रखा है। वहीं 20 हजार रुपए से अधिक चंदा देने वालों से पैन नंबर भी लेने का निर्णय किया था।