आदिवासियों की जमीन पर 'साहबों' का खेल! MP विधानसभा में बड़ा खुलासा: 7 कलेक्टर घेरे में, 650 हेक्टेयर जमीन का सौदा
भोपाल।
मध्य प्रदेश विधानसभा में बड़ा मामला गूंजा है। आदिवासियों की जमीन गैर-आदिवासियों को बेचने के गंभीर आरोपों पर सरकार को सदन में जवाब देना पड़ा। साल 2009 से 2023 के बीच 650 हेक्टेयर से ज्यादा आदिवासी जमीन बेचने की अनुमति कलेक्टरों द्वारा दिए जाने का खुलासा हुआ है। इस मामले में 7 कलेक्टरों की भूमिका सवालों के घेरे में है। पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन के सवाल पर राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा ने बताया कि बुरहानपुर, खंडवा और इंदौर जिलों में यह अनुमतियां दी गईं।
जिलावार आंकड़े
- बुरहानपुर – 196 हेक्टेयर
- इंदौर – 153 हेक्टेयर
- खंडवा – 288 हेक्टेयर
रसूखदारों के दबाव का आरोप
बाला बच्चन ने आरोप लगाया कि साल 2016–17 में मुख्य सचिव के आदेश के बावजूद, विशेष परिस्थितियों के अलावा आदिवासी जमीन बेचने की अनुमति नहीं दी जानी थी। इसके बावजूद रसूखदारों के दबाव में सैकड़ों एकड़ जमीन बेचने की मंजूरी दी गई, जो आदिवासी समाज के साथ बड़ा अन्याय है। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की।
किन अफसरों के कार्यकाल में मिली मंजूरी
बुरहानपुर में 66 मामलों में से 64 को तत्कालीन कलेक्टर आशुतोष अवस्थी ने मंजूरी दी।
इंदौर में कलेक्टर और अपर कलेक्टर स्तर पर कुल 100 मामलों में अनुमति दी गई।
सबसे ज्यादा मंजूरी देने वालों में राकेश श्रीवास्तव, पी. नरहरि, राघवेंद्र सिंह, इलैयाराजा और निशांत बरवड़े शामिल हैं।
पहले भी हो चुकी है कार्रवाई
साल 2023 में जबलपुर और कटनी में ऐसे ही मामलों में 4 IAS अफसरों पर लोकायुक्त में केस दर्ज हुआ था। नाम शामिल: दीपक सिंह, ओमप्रकाश श्रीवास्तव, बसंत कुर्रे, एमपी पटेल। वहीं 2016 में बैतूल में अपर कलेक्टर पवन जैन को निलंबित किया गया था।

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