आजीविका के लिए नहीं, समाजसेवा के लिए हैं ये पद": सरपंचों के मानदेय पर पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल का दो टूक जवाब
भोपाल।
विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरपंचों और पंचों को समय पर मानदेय न मिलने का मुद्दा उठा। श्योपुर जिले की विजयपुर सीट से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा ने विधानसभा में पंचायत मंत्री प्रहलाद पटेल से पूछा कि सरपंचों और पंचों को कितना मानदेय दिया जा रहा है? विधायक ने सदन में कहा कि मैं विधायक बनने के पहले दो साल तक सरपंच था मुझे सिर्फ चार महीने का मानदेय मिला है। इस पर पंचायत मंत्री ने कहा मैं इस मामले की जांच कराऊंगा कि ऐसा कैसे हो गया कि सरपंच का समय पर मानदेय नहीं मिला।
मंत्री बोले-विधायक को मानदेय मिला, उनके बेटे का बकाया
मुझे लगता है कि किसी विधायक का इतना जागरूक होना बेहतर है। मैंने उसकी जानकारी ली तो ये बात सच है कि उनको पहले पांच महीने और बाद के पांच महीने (जब वो विधानसभा चुनाव लड़ रहे होंगे) तब का मानदेय नहीं मिला, लेकिन बीच के कालखंड का वेतन मिला है। उसके पांच महीने बाद उनके पुत्र सरपंच बने। उसका रिकॉर्ड बुलवाया है। पता चला कि उनको पेमेंट नहीं मिला। उसके कारण हमने सीईओ पर भी कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
…तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी
पंचायत मंत्री ने कहा- मैंने ये निर्देश दिए हैं कि किसी भी सरपंच या पंच का मानदेय तीन महीने में नहीं देंगे, तो आपके खिलाफ कार्रवाई होगी। मानदेय बढ़ाने को लेकर मंत्री ने कहा- 2023 में मानदेय बढ़ा है। हमारी विधानसभा की कमेटी सिफारिश करेगी तब करेंगे। या कोई मैकेनिज्म होगा कि जब विधायक का बढ़े तो बाकी जनप्रतिनिधियों का भी उसी रेश्यो में बढ़ जाए उसको लेकर विचार करेंगे।
कांग्रेस विधायक का सवाल
मध्यप्रदेश में सरकार द्वारा सरपंच को 4250/- रुपए एवं वार्ड पंच को ₹200 प्रति माह मानदेय दिया जाता है, क्या इतने कम मानदेय में सरपंच एवं वार्ड पंच अपनी आजीविका चला सकते हैं? क्या सरकार सरपंच का मानदेय ₹25 हजार रुपए एवं वार्ड पंच का मानदेय 15 हजार प्रति माह करने का प्रस्ताव स्वीकृत करेगी, जिससे जनप्रतिनिधियों को लाभांवित किया जा सके। सरपंच एवं पंच के मानदेय में वृद्धि करने का प्रस्ताव कब तक सरकार लाएगी? यदि नहीं, तो क्यों नहीं?
मंत्री बोले-पंच, सरपंच समाजसेवा के पद, आजीविका चलाने के लिए नहीं
पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने जवाब में बताया कि सरपंच को वर्तमान में 4250/- प्रतिमाह, पंच को 300/- प्रति मासिक बैठक के मान से अधिकतम 1800/- वार्षिक दिए जाने का प्रावधान है, जो दिया जा रहा है। सरपंच एवं पंच का चुनाव उनकी स्वेच्छा से समाज सेवा के लिए होता है, आजीविका अर्जन के लिए नहीं। मंत्री ने यह भी कहा कि मानदेय बढ़ाने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
विधायक बोले: समय पर नहीं मिल रहा मानदेय
विधायक मुकेश मल्होत्रा ने पंचायत मंत्री से पूछा कि प्रदेशभर में 23 हजार से अधिक सरपंच और 4 लाख से ज्यादा वार्ड पंच कार्यरत हैं। सरपंचों को 4250 रुपए प्रतिमाह तथा वार्ड पंच को 300 प्रति मासिक बैठक के मान से 1800 रुपए वार्षिक मानदेय दिया जाना क्या वर्तमान समय में यह पर्याप्त है? सरपंच-पंचों के साथ क्या यह न्याय संगत है? सरपंच और पंचों को निर्धारित मानदेय भी समय पर नहीं मिलता है। अभी तक मात्र 14-15 माह का मानदेय ही सरपंचों को दिया गया है और वार्ड पंच के लिए अभी तक इस कार्यकाल में एक पैसा भी नहीं दिया गया है। यह जनता द्वारा चुने जनप्रतिनिधियों के साथ घोर अन्याय है और मजाक है। पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा पंच, सरपंच और जितने भी त्रिस्तरीय पंचायत के प्रतिनिधि हैं, सभी का वर्ष 2013 और इसके बाद में वर्ष 2023 में वेतन बढ़ाया गया था। अभी तीन साल होने वाले हैं। दूसरी बात जो विधायक जी ने कही है कि उनको कुल 15 महीने का वेतन मिला है, शायद उनको जानकारी ठीक करनी चाहिए। मैंने कल ही जानकारी ली थी किसी भी पंच-सरपंच या जनपद या जिला पंचायत के जो हमारे जनप्रतिनिधि हैं, उनका मानदेय सभी को प्राप्त हो रहा है, कोई इतना बैकलॉग नहीं है। मुझे लगता है कि पुन: निरीक्षण करने की जो अवधि है वह सरकार तय करती है, लेकिन वर्ष 2013 के बाद में वर्ष 2023 में हुआ था, मैं यह नहीं कह रहा हूं कि 10 साल बाद होगा, लेकिन जब ऐसी स्थिति आएगी तो निश्चित रूप से इसका पुनरीक्षण होगा।
विधायक बोले: मैं खुद सरपंच था
मुकेश मल्होत्रा: मंत्री जी बिलकुल असत्य जानकारी दे रहे हैं क्योंकि मैं खुद सरपंच था और मैंने दो साल का कार्यकाल पूरा किया, इसमें मात्र मुझे 4 महीने का मानदेय दिया गया है। ऐसे कई सरपंच हैं जिनको अभी मानदेय नहीं मिला है। विभाग द्वारा बताया गया है कि सरपंच एवं पंच समाज सेवा के लिए होते हैं।? यह बात सही है कि यह पद समाज सेवा के लिए होता है, लेकिन यह भी सही है कि प्रत्येक समाज सेवक की अपनी मूलभूत आवश्यकता भी होती है उसके यहां भी परिवार और बच्चे रहते हैं वहां अन्य आवश्यकता होती है। क्या विभाग पंच, सरपंचों के मानदेय बढ़ाने के संबंध में विचार करेगा? मंत्री जी इस विषय पर गंभीरतापूर्वक विचार कर संपूर्ण प्रदेश भर के सरपंचों के मानदेय में बढ़ोत्तरी कराएं।
पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल ने कहा मैं जानना चाहता हूं कि यह अपनी पंचायत का नाम बता दें ताकि हम रिकार्ड निकलवा लें कि इसमें पैसा रह गया है या नहीं ?
विधायक मुकेश मल्होत्रा ने कहा- मेरी ग्राम पंचायत सिलपुरी है और करहल विकासखण्ड में ऐसी कई पंचायतें हैं। मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल -पहले तो मैं उसकी जानकारी ले लूंगा कि जो सरपंच विधायक बन गए हैं लेकिन उनका ही भुगतान नहीं हुआ तो उसकी मैं जानकारी ले लूंगा कि कैसे हो गया ? ऐसा तो नहीं मुकेश जी कि बैंक में आ गया हो ध्यान में ही नहीं आया हो छोटी रकम हो. मुकेश मल्होत्रा - अभी मेरा बेटा भी अभी वर्तमान में सरपंच है तो उसको भी एक महीने का नहीं मिला है।

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