भोपाल।  
मध्यप्रदेश की राजनीति में अपने अनुशासन और संकल्पों के लिए पहचाने जाने वाले पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। वजह कोई बयान नहीं, बल्कि उनका 'मंच' पर बैठना है। करीब 10 महीने पहले ग्वालियर की 'संविधान बचाओ रैली' में दिग्विजय सिंह ने सार्वजनिक रूप से कसम खाई थी कि वे अब कभी कांग्रेस के मंच पर नहीं बैठेंगे और कार्यकर्ताओं के बीच नीचे बैठेंगे। लेकिन मंगलवार को भोपाल में राहुल गांधी के कार्यक्रम में यह सौगंध टूटती नजर आई।
क्या थी वो कसम?
अप्रैल 2025 में दिग्विजय सिंह ने मंचों पर होने वाली खींचतान और गुटबाजी को खत्म करने का संदेश देते हुए कहा था— "मैं अब किसी भी मंच पर नहीं बैठूंगा, मैं नीचे बैठ जाऊंगा। बस बोलने का मौका आए तो मुझे बुला लिया जाए। कृपया मंच की लड़ाई को समाप्त करें।" इस घोषणा के बाद कई कार्यक्रमों में वे जमीन पर या सोफे पर कार्यकर्ताओं के साथ बैठे भी दिखे, जिसकी काफी सराहना हुई थी।
बीजेपी का तीखा प्रहार
जैसे ही दिग्विजय सिंह राहुल गांधी के साथ मंच पर नजर आए, भाजपा को हमला करने का मौका मिल गया। प्रदेश सरकार के मंत्री गोविंद सिंह राजपूत ने चुटकी लेते हुए कहा कि राजनीति में असली लड़ाई ही 'मंच और कुर्सी' की होती है। उन्होंने तंज कसा कि कोई भी नेता सत्ता और कुर्सी के मोह से दूर नहीं रह सकता, और दिग्विजय सिंह ने यह साबित कर दिया है।
इतिहास और वर्तमान का विरोधाभास
दिलचस्प बात यह है कि दिग्विजय सिंह अपने वादों के पक्के माने जाते रहे हैं। साल 2003 में कांग्रेस की हार के बाद उन्होंने 10 साल तक कोई पद न लेने का संकल्प लिया था और उसे बखूबी निभाया भी। लेकिन 'मंच' न चढ़ने वाली यह हालिया कसम 10 महीने भी नहीं टिक पाई। हालांकि, राहुल गांधी के कार्यक्रम में वे मंच पर तो थे, लेकिन उन्हें बोलने का अवसर नहीं मिला।