भोपाल।
मध्य प्रदेश सरकार अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल 'भविष्य कहने वाली' यानी प्रेडिक्टिव गवर्नेंस के लिए करेगी। इससे स्वास्थ्य, कृषि, पोषण, रोजगार और आपदाओं जैसे क्षेत्रों में आने वाले खतरों का पहले ही पता लगाया जा सकेगा, ताकि समय पर कदम उठाए जा सकें। यह राज्य सरकार की नई AI पॉलिसी का एक अहम हिस्सा है।
AI समिट में पहुंचे थे सीएम
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में नई दिल्ली में हुए इंपैक्ट समिट 2026 में एमपी में एक मजबूत AI इकोसिस्टम बनाने की घोषणा की थी। सरकार AI से जुड़े वादों को हकीकत में बदलने के लिए तेजी से काम कर रही है। इसके लिए खास ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप बनाए गए हैं। नई AI पॉलिसी में शासन में AI का इस्तेमाल करने के लिए कई बड़े बदलावों की योजना है। इस समिट ने मध्य प्रदेश को AI के मामले में एक अग्रणी राज्य बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया है। सरकार का ध्यान अपनी खुद की AI इंफ्रास्ट्रक्चर, कम बिजली खपत वाले डेटा सेंटर, शासन के लिए जनरेटिव AI, डीप-टेक स्किलिंग और स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने पर है।
विभाग ने तैयार किया रोडमैप
विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग ने एक योजनाबद्ध रोडमैप तैयार किया है। इसके तहत एमओयू (समझौते), एलओआई (इरादे के पत्र) और वैश्विक उद्योग के साथ हुई बातचीत को राज्य के लिए फायदेमंद बनाने की कोशिश की जाएगी। हर एमओयू के तहत बने ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप पायलट जिलों, विभागों के लिए AI के उपयोग के तरीके, मापने योग्य लक्ष्य और लागू करने की समय-सीमा तय करेंगे।
नई AI पॉलिसी में क्या क्या है?
सरकार की मुख्य प्राथमिकताओं में AI सैंडबॉक्स लॉन्च करना, डिजिटल ट्विन टेस्ट, सबमर स्टडी, 2-3 विभागों में जनरेटिव AI का उपयोग और अधिकारियों व छात्रों के लिए स्किलिंग प्रोग्राम शामिल हैं। AI पॉलिसी के तहत AI-ऑगमेंटेड एडमिनिस्ट्रेशन (AI-संवर्धित प्रशासन) अधिकारियों को दस्तावेज बनाने, सारांश लिखने, विश्लेषण करने और बेहतर निर्णय लेने में मदद करेगा। साथ ही, AI को सरकारी योजनाओं में भी शामिल किया जाएगा, ताकि यह सिर्फ शुरुआती प्रयोगों से आगे बढ़कर बड़े पैमाने पर लागू हो सके।