भोपाल। 
अटेर विधायक और मध्य प्रदेश विधानसभा में उप नेता प्रतिपक्ष पद से कार्यमुक्ति की इच्छा जताने वाले हेमंत कटारे ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि विधानसभा में जनहित और गंभीर मुद्दों पर चर्चा नहीं हो पा रही है। इसी कारण उन्होंने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष को पत्र लिखकर पद से मुक्त करने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पत्र प्रचार के लिए नहीं, बल्कि उनके मन की भावना थी। कटारे ने कहा कि उनका निर्णय पार्टी के खिलाफ नहीं, बल्कि सदन की परिस्थितियों को लेकर है। उन्होंने आरोप लगाया कि भोपाल के गौमांस प्रकरण और भागीरथपुरा में हुई मौतों जैसे मुद्दों पर सरकार चर्चा से बचती रही। “जब गंभीर विषयों पर बात ही नहीं हो रही, तो मन व्यथित होना स्वाभाविक है,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी माना कि पद की जिम्मेदारियों के चलते वे परिवार और क्षेत्र को समय नहीं दे पा रहे थे, जिससे व्यक्तिगत स्तर पर भी दबाव बना। इस्तीफे को सरकार के दबाव से जोड़ने के सवाल पर कटारे ने दो टूक कहा, “मैं किसी पद के कारण नहीं बोलता। मेरी आवाज पहले से ज्यादा मजबूती से गूंजेगी।” केस री-ओपन होने और संभावित दबाव के आरोपों पर उन्होंने कहा, “हम चंबल का खून हैं। FIR आती है तो हम पार्टी करते हैं। डरने वाले नहीं हैं।” कटारे ने यह भी साफ किया कि वे पार्टी के फैसले का सम्मान करेंगे, लेकिन अपने राजनीतिक रुख से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि वे लंबी राजनीति के लिए आए हैं और सरकार के खिलाफ विपक्ष की भूमिका और मजबूती से निभाते रहेंगे।