भोपाल।
 मध्य प्रदेश में हर दिन लगभग 130 महिलाओं और लड़कियों के लापता होने की चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। यह आंकड़ा 2020 से 28 जनवरी 2026 तक का है। इस दौरान कुल 2,74,311 महिलाएं या लड़कियां गायब हुई हैं। यह जानकारी मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा विधानसभा में दिए गए एक लिखित जवाब से सामने आई है, जिसमें यह भी बताया गया है कि इनमें से 2,35,977 को ट्रेस कर लिया गया है, लेकिन 68,334 महिलाएं और लड़कियां अभी भी लापता हैं। यह स्थिति चिंताजनक है और हर साल 30,000 से अधिक महिलाओं के लापता होने के पैटर्न को उजागर करती है, जिसमें 2021 में यह संख्या 39,000 से अधिक और 2023 में 40,000 को पार कर गई थी।
हर साल 45000 महिलाएं होती हैं लापता
यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब हम इसे सालाना आंकड़ों में देखते हैं। आंकड़ों की मानें तो हर साल लगभग 45,000 महिलाएं लापता हो जाती हैं, जो महीने का लगभग 3,700 और रोज का लगभग 130 होता है। यह पैटर्न पिछले छह वर्षों से लगातार बना हुआ है। 2020 में 30,000 से अधिक महिलाएं लापता हुईं। 2021 में यह संख्या बढ़कर 39,000 से अधिक हो गई। 2023 में, यह आंकड़ा फिर से 40,000 को पार कर गया। यहां तक कि 2025 में भी, 31,000 से अधिक मामले दर्ज किए गए। 2026 के शुरुआती हफ्तों में ही 1,000 से अधिक महिलाओं के लापता होने की सूचना मिली थी।
इन शहरों में हालात चिंताजनक
प्रमुख शहर जैसे इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर और उज्जैन लगातार उच्च संख्या दर्ज कर रहे हैं। इसके अलावा, कई आदिवासी और सीमावर्ती जिलों में भी रिपोर्ट किए गए और ट्रेस किए गए मामलों के बीच चिंताजनक अंतर दिखाई देता है। इन आंकड़ों ने मानव तस्करी नेटवर्क, जबरन विवाह, शोषण और ट्रैकिंग तंत्र में प्रणालीगत कमजोरियों के बारे में गंभीर चिंताएं पैदा की हैं।
कांग्रेस विधायक ने पूछा था सवाल
कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि जब लाखों महिलाएं लापता हैं, तो यह केवल कानून और व्यवस्था का मामला नहीं है। उन्होंने कहा, 'जब लाखों महिलाएं ट्रेस नहीं हो पा रही हैं, तो यह सिर्फ कानून और व्यवस्था का मुद्दा नहीं है। यह एक संरचनात्मक विफलता है। हम इसे नियमित गुमशुदगी की रिपोर्ट के रूप में नहीं मान सकते। इसके लिए जवाबदेही और पारदर्शिता के उच्चतम स्तर की आवश्यकता है।' उन्होंने इस स्थिति की तुलना अंतरराष्ट्रीय शोषण घोटालों जैसे एपस्टीन फाइलों से की।

पूरा मामला समझिए

  • 1: मुख्यमंत्री मोहन यादव ने विधानसभा में लिखित जवाब में पुष्टि की है कि 2020 से 28 जनवरी 2026 तक 2,74,311 महिलाएं लापता हुईं।
  • 2: औसतन हर साल 45,000 और हर महीने 3,700 महिलाएं गायब हो रही हैं, जो राज्य की कानून व्यवस्था पर बड़ा सवाल है।
  • 3: इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और जबलपुर जैसे बड़े शहरों के साथ-साथ आदिवासी जिलों में भी महिलाओं के गायब होने का ट्रेंड डराने वाला है।
  • 4: कुल लापता महिलाओं में से करीब 68,334 का अब तक पता नहीं चल पाया है, जिससे मानव तस्करी और शोषण की आशंका बढ़ गई है।
  • 5: साल 2026 के शुरुआती कुछ ही हफ्तों में 1,000 से ज्यादा महिलाएं लापता हो चुकी हैं, जो बताता है कि स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।