विधानसभा में ‘औकात’ टिप्पणी पर बवाल, हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने जताया खेद
भोपाल।
विधानसभा के बजट सत्र में गुरुवार को राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सदन का माहौल गरमा गया। बेरोजगारी, बिजली दरों, आरक्षण, निवेश और अदाणी से जुड़े मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। तीखी नोकझोंक के बीच कई बार कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विवाद खत्म करने के लिए माफी मांगी, जिसके बाद स्थिति सामान्य हुई। राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार 25 साल में बिजली खरीद के नाम पर एक से सवा लाख करोड़ रुपये अदाणी समूह को देने की तैयारी में है। प्रदेश में महंगी बिजली मिल रही है, जबकि प्रदेश के बाहर बिजली बेची जा रही है। इससे जनता को नुकसान हो रहा है। इस पर संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि गलत जानकारी ना दें। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उनके पास सबूत हैं और वो इसका प्रमाण दे सकते हैं। इस बीच मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने उन्हें 'औकात में रहने' की नसीहत दे दी। इस टिप्पणी पर विपक्ष भड़क गया और सदन में हंगामा शुरू हो गया। विपक्ष के सदस्य गर्भगृह में आकर नारेबाजी करने लगे। इसके बाद सत्ता पक्ष के विधायक भी वेल में आए। हंगामा शांत नहीं होने पर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही 10 मिनट के लिए स्थगित कर दी। सदन की कार्रवाई शुरू होने पर फिर हंगामा शुरू हो गया, जिसके बाद 15 मिनट के लिए फिर सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। विपक्ष के विधायकों ने कैलाश विजयवर्गीय से माफी की मांग की।
मर्यादा बनाए रखना सबकी जिम्मेदारी : स्पीकर
सदन की कार्यवाही फिर शुरू होने के बाद विवाद बढ़ने पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि आज का दिन कुछ गरम गरम है। सदन के नियम और परंपरा का पालन के साथ मर्यादा बताए रखना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि आज थोड़ी असहज स्थिति बन गई। अध्यक्ष ने कहा कि आज पूर्व सीएम सुंदरलाल पटवा की याद आ गई। वह कहते थे कि सदन में बात करते समय गुस्सा दिखना चाहिए, लेकिन गुस्सा आना नहीं चाहिए। गुस्सा दिखे, लेकिन आए नहीं, यह लोकतंत्र के लिए जरूरी है।
मंत्री विजयवर्गीय ने जताया खेद
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने सदन में अपने व्यवहार पर खेद जताते हुए कहा कि 37 साल के राजनीतिक जीवन में वे आज खुद से संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब अध्यक्ष, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जैसे जिम्मेदार पदों पर बैठे लोग संसदीय मर्यादा नहीं निभाएंगे तो अन्य सदस्यों से कैसे अपेक्षा की जा सकती है। उन्होंने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनकी बॉडी लैंग्वेज से वे विचलित हुए, लेकिन वे उन्हें स्नेह करते हैं और अपने व्यवहार से दुखी हैं।
सिंघार ने भी खेद जताया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यदि किसी को ठेस पहुंची हो तो वे अपनी ओर से सभी से माफी मांगते हैं। इस पर नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि सीएम ने जो भाव दिखाया, मैं उसका सम्मान करता हूं। मैं चार बार विधायक हूं, संसदीय शब्दावली का ध्यान रखने की कोशिश करता हूं। उन्होंने कहा कि मैं कभी अहम में नहीं आता। यदि मेरी तरफ से कुछ हुआ है तो मैं भी खेद व्यक्त करता हूं।

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