चादर चोरों से परेशान है रेलवे, एक साल में 34 लाख रुपए की लगाई है चपत
भोपाल।
क्या आप जानते हैं कि ट्रेन के कोच में मिलने वाली सफेद चादर और मुलायम तकिए सफर खत्म होने के बाद कहां जा रहे हैं? चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरामदायक सफर की ये सुविधाएं अब चोरों और लापरवाह यात्रियों की पहली पसंद बन गई हैं। पिछले दो सालों में भोपाल मंडल सहित रेलवे को लिनन चोरी के कारण 34 लाख रुपए से ज्यादा का तगड़ा झटका लगा है। सफेद बेडशीट इस 'लूट' की लिस्ट में टॉप पर है।
11,709 लिनन चादर गायब
सफेद चादर पर 'दाग', हजारों आइटम हुए गायब आंकड़ों की परतें खोलें तो मंजर और भी हैरान करने वाला है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 11,709 लिनन आइटम ट्रेनों से 'गायब' हो गए। सिलसिला यहीं नहीं थमा, साल 2025 के शुरुआती आठ महीनों में ही चोरों ने 11,682 आइटम पार कर दिए। आलम यह है कि लंबी दूरी की ट्रेनों, खासकर बिहार रूट, अगरतला और हमसफर एक्सप्रेस में चादरें और तकिए बचाना रेलवे के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है।
अटेंडेंट की जेब पर डाका
अटेंडेंट की जेब पर डाका और अधिकारियों की गुहार चोरी यात्रियों के बैग में होती है, लेकिन इसकी मार बेचारे स्टाफ और ठेकेदारों पर पड़ती है। नियम के मुताबिक, सामान कम होने पर हर्जाना कोच अटेंडेंट और कॉन्ट्रैक्टर के बिल से वसूला जाता है। रेलवे के पीआरओ नवल अग्रवाल ने इस 'सफेद लूट' पर चिंता जताते हुए यात्रियों से इमोशनल अपील की है कि वे सरकारी संपत्ति को अपना समझें। याद रखें, जो चादर आज आप अपने घर ले जा रहे हैं, कल उसी की कमी के कारण किसी दूसरे यात्री को बिना बिस्तर के रात काटनी पड़ सकती है।

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