भोपाल। 
राजधानी भोपाल के अयोध्या बायपास चौड़ीकरण के लिए हरे पेड़ों की कटाई के खिलाफ दायर एक याचिका की सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल( NGT) ने बुधवार को पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है.   बायपास चौड़ीकरण के लिए कुल 8 हजार पेड़ों को काटा जाना था. रोक के बाद प्रोजेक्ट में खटाई खटाई में पड़ सकता है.बुधवार को अयोध्या बायपास चौड़ीकरण के हरे पेड़ों की कटाई को लेकर हुई सुनवाई करते हुए एनजीटी ने पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है. पेड़ों की कटाई पर रोक का आदेश देते हुए एनजीटी ने कहा कि अगली सुनवाई तक एक भी पेड़ नहीं कटेगा. अगली सुनवाई 8 जनवरी को होनी है.
खटाई में पड़ सकता है 16 किलोमीटर लंबा 10 लेन वाला प्रोजेक्ट 
गौरतलब है एनजीटी द्वारा हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने से करीब 16 किलोमीटर लंबे 10 लेन वाला अयोध्या बायपास चौड़ीकरण प्रोजेक्ट खटाई में पड़ सकता है. हालांकि बिना हरे पेड़ों के काटे सड़क चौड़ीकरण का काम बदस्तूर जारी रहेगा. हालांकि एनजीटी ने सुनवाई के दौरान बड़े ही सख्त अंदाज में कहा है कि, नियम पहले, प्रोजेक्ट बाद में होता रहेगा. 

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हरे पेड़ों की कटाई ने वृक्ष संरक्षण कानून पर उठा दिए सवाल
रिपोर्ट के मुताबिक अयोध्या बाइपास चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित 8000 हरे पेड़ों की कटाई के फैसले ने वृक्ष संरक्षण कानून पर भी सवाल उठा दिए हैं. बायपास चौड़ीकरण के लिए 8000 हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए एनजीटी में अपनी टिप्पणी में प्रतिपूरक वनीकरण पर भी सरकार से जवाब मांगा और कहा है कि विकल्पों पर भी विचार जरूरी है.  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल द्वारा हरे पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक के बाद अभी तक कमेटी की रिपोर्ट सामने नहीं आई है. मामले की अगली सुनवाई एनजीटी 8 जनवरी को करेगी, जिसके बाद आगे का रास्ता तय होगा. एनजीटी ने टिप्पणी में प्रतिपूरक वनीकरण को लेकर भी जवाब मांगा है?
रोक के बावजूद बिना पेड़ काटे चलता रहेगा सड़क का काम
NGT ने बायपास चौड़ीकरण के लिए हरे पेड़ों की कटाई पर रोक लगाते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक एक भी पेड़ नहीं कटेगा. इससे 16 किमी लंबे 10 लेन वाला बड़ा प्रोजेक्ट सवालों के घेरे में आ गया है. एनजीटी के आदेश को मोहन सरकार के लिए एक झटके के रूप में देखा जा रहा है.