रायसेन।
मध्य प्रदेश में विकास की इबारत लिखने वाले हाथों ने सरकार के खिलाफ कलम और औजार छोड़, विरोध का झंडा उठा लिया है. सोमवार को रायसेन जिला मुख्यालय स्थित सर्किट हाउस में मध्य प्रदेश इंजीनियर संगठन के बैनर तले सैकड़ों इंजीनियरों ने हुंकार भरी. यह विरोध केवल रायसेन तक सीमित नहीं है, बल्कि सिवनी, बुरहानपुर, उज्जैन, मुरैना और छतरपुर में भी इंजीनियरों ने कामकाज ठप कर अपना आक्रोश जताया है.
'डर के साए में रखे जाते हैं इंजीनियर'
प्रदर्शनकारी इंजीनियरों का आरोप है कि वे दिन-रात धरातल पर पसीना बहाते हैं, लेकिन सरकार उनकी ईमानदारी पर सवाल उठाती है. इंजीनियर संगठन के सहायक महामंत्री कपिल त्यागी ने कहा, "हम गुणवत्ता से समझौता नहीं करते, लेकिन जांच के नाम पर प्रताड़ना बर्दाश्त नहीं होगी. बिना स्टाफ और बिना गाड़ी के मॉनिटरिंग करना नामुमकिन है. खराब काम करने वाले ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं की जाती है, जबकि सारा ठीकरा इंजीनियरों पर फोड़ा जाता है.
'प्रदेश में इंजीनियर के 600 पद खाली'
इंजीनियर संगठन के महामंत्री इंजीनियर अनिल कुमार जैन ने बताया कि "प्रदेश में 600 से अधिक पद खाली पड़े हैं. स्टाफ की कमी और मॉनिटरिंग के लिए वाहनों की अनुपलब्धता के बावजूद उनसे शत-प्रतिशत परिणाम की उम्मीद की जाती है. एक ही आदमी एकसाथ अलग-अलग साइट पर चल रहे काम पर नजर नहीं रख सकता है. इसके साथ ही एक ही काम की बार-बार जांच करा इंजीनियरों को भय के साए में रखा जा रहा है."
शासन के निर्देश पर होती है रूटीन जांच
मामले को शांत कराने के लिए एमपीआरडीसी और अन्य विभागों के चीफ इंजीनियर मौके पर पहुंचे. पीडब्ल्यूडी के अधिकारी जीपी पटेल ने कहा कि "जांच करना एक नियमित प्रक्रिया है, जो शासन के भी निर्देश हैं, ताकि गुणवत्ता बनी रहे. लेकिन हमें जांच करने से रोका जा रहा है, जो सही नहीं हैं." उन्होंने भरोसा दिलाया कि बातचीत के जरिए समस्या का समाधान निकाल लिया जाएगा और इंजीनियरों को हड़ताल पर नहीं जाना चाहिए.
'त्रुटि में सुधार का आधार है जांच'
एमपीआरडीसी के चीफ इंजीनियर राकेश जैन ने कहा कि "हर स्तर पर रैंडम जांच की जाती है ताकि काम की गुणवत्ता सही रहे. कई बार जब त्रुटि होने पर उस पर सुधार किया जाता है. जांच सुधार का आधार है, न कि किसी के ऊपर दबाव बनाने के लिए जांच की जाती है."