आर्य समाज मंदिर धार्मिक नहीं, शराब दुकान को लेकर HRC के नोटिस के जवाब में आबकारी विभाग का बेतुका जवाब
भोपाल।
भोपाल के अरेरा कॉलोनी क्षेत्र में आर्य समाज मंदिर के पास संचालित शराब दुकान को लेकर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग HRC ने राज्य सरकार को नोटिस भेजा था। यह नोटिस आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो द्वारा शिकायत मिलने के बाद जारी किया गया था, लेकिन इस पर विभागीय अधिकारियों की ओर से दिए गए जवाब ने खुद कानूनगो को हैरान कर दिया। उन्होंने इस जवाब को सरकारी बाबुओं की बेशर्मी बताते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किया और कड़ी प्रतिक्रिया दी।
प्रियंक कानूनगो के अनुसार, आबकारी विभाग की ओर से मिले जवाब में कहा गया है कि नियमों के अनुसार आर्य समाज मंदिर को मंदिर की श्रेणी में नहीं माना जा सकता, इसलिए उस स्थान के समीप शराब दुकान संचालित करने में कोई आपत्ति नहीं है। कानूनगो ने इस उत्तर पर आपत्ति जताते हुए लिखा कि यह सोच न केवल धार्मिक भावनाओं को आहत करती है, बल्कि आर्य समाज जैसे संस्थान की ऐतिहासिक भूमिका की भी अवहेलना करती है। उन्होंने कहा कि कदाचित यही वे पतित हिंदू हैं, जो हिंदू समाज की दुर्दशा के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने हिंदू समाज में व्याप्त कुरीतियों को समाप्त करने और अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए आर्य समाज की स्थापना की थी। आर्य समाज मंदिरों में जाति-भेद रहित वैदिक संस्कार आयोजित किए जाते हैं और यह स्थान सदैव सामाजिक सुधार और अध्यात्म के केंद्र रहे हैं।

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