भोपाल। 
मध्य प्रदेश में जहरीली सिरप से लगभग 25 मासूम बच्चों की मौत के बाद अब सरकार एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्वास्थ्य विभाग में बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक विभाग से जुड़े छह वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों को हटाने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वास्थ्य विभाग में व्याप्त लापरवाही और जिम्मेदारी तय न होने के चलते अब मुख्यमंत्री बड़े स्तर पर फेरबदल कर सकते हैं।
हटाए जा सकते हैं ये छह अधिकारी
1. संदीप यादव – प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य
2. तरुण राठी – कमिश्नर, स्वास्थ्य सेवाएं
3. दिनेश श्रीवास्तव – संचालक, प्रशासन
4. मयंक अग्रवाल – संचालक, अस्पताल
5. डॉ. सलोनी सडाना – मिशन निदेशक, एनएचएम
6. नीरज सिंह – संचालक, प्रोजेक्ट

खबर है कि इन सभी छह अधिकारियों को एक साथ हटाने की तैयारी चल रही है। सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री इस मामले में सख्त रुख अपना चुके हैं और संकेत दिए हैं कि अब लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
ठेकेदारी और दलाली पर उठे सवाल
स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि विभाग में ठेकेदारों और बिचौलियों का दबदबा बढ़ चुका है, जिससे सरकारी निगरानी कमजोर हुई है। 25 बच्चों की मौत के बाद भी अब तक किसी अधिकारी की सीधी जिम्मेदारी तय नहीं की गई, जिससे जनता में नाराजगी है।
अमानक दवाओं का नया मामला
मामला यहीं खत्म नहीं होता। हाल ही में 23 और 26 सितंबर को आंगनवाड़ी और स्कूलों में बच्चों को पेट के कीड़ों की दवा एल्बेंडाजोल आईपी 400 बांटी गई, जिसे अमानक पाया गया। अशोकनगर जिले के सीएमएचओ ने इस संबंध में पत्र जारी किया है। सवाल उठ रहा है कि जब बच्चों की मौतों से राज्य हिल चुका है, तो अमानक दवाएं कैसे वितरित हो गईं?
मुख्यमंत्री के एक्शन से तय होगा भविष्य
स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से व्याप्त कमीशनबाजी और दलाली पर मुख्यमंत्री का यह कदम निर्णायक साबित हो सकता है। यदि छह आईएएस अधिकारियों को हटाने की कार्रवाई होती है, तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि सरकार अब किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी।