मप्र के स्वास्थ्य विभाग पर दलालों का कब्जा? खुफिया विभाग की निगरानी में दो प्रभावशाली चेहरे – ‘आदित्य’ और ‘सोनू’
भोपाल,सबकी खबर।
मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में चल रहे कथित भ्रष्टाचार और ठेका घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा सामने आया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, विभाग के दो प्रभावशाली व्यक्तियों — आदित्य और सोनू — पर अब खुफिया एजेंसियों की नजरें टिकी हुई हैं। बताया जा रहा है कि दोनों ही बीते लंबे समय से विभाग में ठेके और सप्लाई से जुड़े फैसलों को अपने स्तर पर नियंत्रित कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सोनू प्रमुख सचिव से सीधे संपर्क में रहकर काम करता है, जबकि आदित्य खुद को केंद्र सरकार के एक मंत्री का पीए बताकर मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में सक्रिय है। विभाग में कौन ठेके लेगा, किसे सप्लाई का काम मिलेगा — इन दोनों के इशारे पर तय होता है। सूत्रों ने यह भी बताया कि मध्य प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग लगभग 70 से 80 प्रतिशत तक ठेका प्रथा के हवाले कर दिया गया है। कई बड़ी सप्लाई कंपनियां और जांच एजेंसियां इन्हीं दोनों के माध्यम से काम कर रही हैं। गंभीर बात यह है कि हाल ही में राज्य में 24 बच्चों की मौत ने स्वास्थ्य तंत्र की पोल खोल दी है। बताया जा रहा है कि उपमुख्यमंत्री, जिनके पास स्वास्थ्य विभाग का जिम्मा है, ने भी उच्च स्तर पर यह शिकायत की है कि विभाग में उनकी नहीं चलती। विभाग पर दलालों का दबदबा कायम है। इसी बीच, केंद्रीय खुफिया ब्यूरो (IB) ने भी इस पूरे मामले पर निगरानी शुरू कर दी है। आदित्य और सोनू के टेलीफोन रिकॉर्ड, सीडीआर, बैंक लेनदेन और मूवमेंट पर नजर रखी जा रही है। विश्वसनीय सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में इस प्रकरण में बड़े खुलासे और छापेमारी की कार्रवाई संभव है। राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में इस खबर के बाद हड़कंप मच गया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर स्वास्थ्य मंत्री और प्रमुख सचिव की अनदेखी करते हुए यह दोनों कैसे विभाग को संचालित कर रहे हैं?

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