भोपाल। 
मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर सियासत जारी है। भाजपा और कांग्रेस श्रेय लेने एक दूसरे पर लगातार आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं। अब मंत्री कृष्णा गौर ने ओबीसी आरक्षण को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई पर कांग्रेस पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेताओं पर ओबीसी आरक्षण को लेकर चल रही सुनवाई को लेकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद मध्य प्रदेश में 55 वर्षों तक शासन करने वाली कांग्रेस ने अन्य पिछड़ा वर्ग की कभी सुध नहीं ली। कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की कभी मंशा ही नहीं थी कि ओबीसी वर्ग को उसका हक मिल सके। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ईमानदार और सकारात्मक प्रयासों से ओबीसी को उसका हक दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी मामले में कांग्रेस पार्टी जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है।  गौर ने कहा कि सच तो यह है कि ओबीसी वर्ग को लेकर गठित कालेलकर आयोग की रिपोर्ट और मंडल कमीशन की रिपोर्ट दबाने का काम कांग्रेस पार्टी ने किया था। राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा देने की मांग भारतीय जनता पार्टी लगातार करती आ रही थी, लेकिन सत्ता के मद में मदहोश कांग्रेस पार्टी ने कभी भी राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा नहीं दिया। 
ओबीसी वर्ग को मुख्य धारा से दूर रखने का काम कांग्रेस ने किया 
गौर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने ओबीसी वर्ग को मुख्य धारा से दूर रखने का कार्य किया। केंद्र की भाजपा सरकार ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा दिया है। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी ओबीसी वर्ग से हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व की मध्य प्रदेश की भाजपा सरकार ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है। मध्य प्रदेश सरकार सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर ओबीसी समाज को उसका हक दिलाने के लिए सार्थक प्रयास कर रही है। मध्य प्रदेश सरकार के प्रयास ईमानदार और सकारात्मक हैं। हमें आशा ही नहीं, अपितु पूर्ण विश्वास है कि मध्य प्रदेश सरकार दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर ओबीसी वर्ग को उसका हक दिलाने का जो प्रयास कर रही है, उसमें वह पूरी तरह से सफल होगी।