भोपाल में IAS अधिकारियों की हवेली पर चलेगा बुलडोजर? एमपी हाईकोर्ट का आया है बड़ा आदेश
भोपाल।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बड़े पदों पर रहने वाले पूर्व आईएएस अधिकारियों की हवेलियों पर बुलडोजर चल सकता है। इन अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर लो डेनसिटी एरिया में निर्माण किया है। एमपी हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई के बाद इन अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। इसमें दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारी, एक कारोबारी, शहरी प्रशासन आयुक्त, भोपाल नगर निगम आयुक्त, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के डायरेक्टर और व्हिस्परिंग पाम्स सोसाइटी के बिल्डर सहित कई लोग शामिल हैं।
नियमों की अनदेखी कर किया निर्माण
दरअसल, भोपाल के कलियासोत बांध के पास एक पॉश सोसाइटी है। इसका नाम व्हिस्परिंग पाम्स है। इस सोसायटी बड़े अधिकारियों के घर हैं। राज्य के दो-दो पूर्व मुख्य सचिव का यहां निवास है। आरोप है कि इन लोगों ने भोपाल मास्टर प्लान-2005 के नियमों का घोर उल्लंघन कर तय सीमा से अत्याधिक निर्माण किया है। इसी को लेकर हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद नोटिस जारी
दरअसल, जस्टिस विशाल मिश्रा की बेंच ने याचिकाकर्ताओं महेश सिंह परमार और राज बहादुर प्रसाद की याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद ये नोटिस जारी किए। याचिकाकर्ताओं के वकील राहुल दिवाकर और हर्षवर्धन तिवारी ने बताया कि कुछ लोगों ने कलियासोत बांध के पास पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में 'घोर अवैध और अत्यधिक' निर्माण किया है।
0.06 रेशियो में कर सकते हैं निर्माण
याचिकाकर्ताओं के अनुसार 'व्हिस्परिंग लेआउट' नाम की इस परियोजना को भोपाल मास्टर प्लान-2005 के तहत केवल कम घनत्व वाले आवासीय विकास के रूप में मंजूरी मिली थी। कम घनत्व वाले क्षेत्रों के लिए तय ज़ोनिंग नियमों और योजना मानकों के अनुसार, निर्माण की अधिकतम सीमा प्लॉट के कुल क्षेत्रफल का 6% (1:0.06 का फ्लोर एरिया रेशियो - FAR) है। इसका मतलब है कि 10,000 वर्ग फुट के न्यूनतम प्लॉट आकार पर अधिकतम 600 वर्ग फुट तक ही निर्माण किया जा सकता है।
50 फीसदी से अधिक हिस्से में किया निर्माण
लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा है कि प्रतिवादियों ने इन नियमों का उल्लंघन करते हुए स्वीकृत योजना और नियमों को ताक पर रखकर प्लॉट के 50% से अधिक हिस्से, यानी 5,000 वर्ग फुट से अधिक का निर्माण कर लिया है।

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