4 बिंदुओं पर टिकी जांच:डीम्ड ईसी किसने, किस बुनियाद पर जारी की, दो महीने बैठक क्यों नहीं हुई, क्या कोई आर्थिक लेनदेन हुआ...
भोपाल।
मध्यप्रदेश स्टेट एनवायरोमेंट इम्पैक्ट असेसमेंट अथॉरिटी (सिया) से जुड़े विवाद पर केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की फैक्ट फाइंडिंग कमेटी ने बुधवार को दिल्ली में बैठक की।
पर्यावरण मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव अमनदीप गर्ग की अध्यक्षता वाली कमेटी ने साढ़े तीन घंटे से अधिक समय तक दिल्ली के पर्यावरण भवन में सिया विवाद से जुड़े सभी अधिकारियों, सिया के चेयरमैन और सदस्य से अलग-अलग बात की।
मप्र पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी, प्रभारी सदस्य सचिव के रूप में डीम्ड ईसी पर हस्ताक्षर करने वाले आईएएस श्रीमन शुक्ला, सिया की तत्कालीन सदस्य सचिव आर उमा महेश्वरी कमेटी के सामने उपस्थित हुईं।
सिया के चेयरमैन शिवनारायण सिंह चौहान और सदस्य सुनंदा सिंह रघुवंशी से भी कमेटी ने बात की। मप्र पर्यावरण विभाग के एसीएस अशोक बर्णवाल की प्रतिनिधि के तौर पर डिप्टी सेक्रेटरी वर्षा भूरिया और एनवायरोमेंट प्लानिंग एंड कार्डिनेशन संगठन (एप्को) के कार्यकारी निदेशक व सिया के मौजूदा सदस्य सचिव दीपक आर्य से भी कमेटी ने अलग से बात की।
कमेटी ने सभी कुछ कॉमन सवाल करते हुए पूछा कि आखिर 237 डीम्ड पर्यावरणीय मंजूरी किसने, किसके निर्देश पर और किस नियम की बुनियाद पर जारी कीं। इसके साथ ही कमेटी ने यह भी पूछा कि सिया चेयरमैन का दफ्तर किसने और किस कारण से लॉक कराया था? सिया की बैठकें दो महीने तक नहीं हो पानी की असल वजह क्या थी? क्या इन ईसी को जारी करने में कोई आर्थिक लेनदेन हुआ या नहीं? सभी ने अपने-अपने तर्कों के साथ जबाव दिए।
अफसर बोले- अध्यक्ष ने खुद 4 बैठकों का बहिष्कार किया
अफसरों ने कमेटी को बताया कि जनवरी से मई तक 21 बैठकें हुईं, जिनमें 300 से अधिक प्रकरणों पर विचार हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि अध्यक्ष ने अप्रैल की चार बैठकों का बहिष्कार यह कहते हुए कर दिया कि उनसे अनुमोदन नहीं कराया गया। अध्यक्ष द्वारा 10 दिन से अधिक समय तक एजेंट की फाइलें रोकी गई, इस कारण बैठकों की तारीख तय नहीं हो पाई। अफसरों ने उन पर कूटरचित दस्तावेज बनाने का भी आरोप लगाया। कमेटी ने सभी पक्षों की बात सुनकर 3 दिन में लिखित जवाब मांगे हैं। जवाब 4 अक्टूबर तक देना है। 7 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में इस विवाद पर सुनवाई हो सकती है। इसमें मंत्रालय को रिपोर्ट पेश करनी होगी।
237 में से 186 को मंजूरी
बताया गया कि जिन 237 प्रकरणों का सिया चेयरमैन के अनुमोदन के बिना निराकरण किया गया, वैसे 186 प्रकरणों में पर्यावरणीय मंजूरी जारी की गई थी। 37 में टर्म का रिफरेंस और 10 को रिजेक्ट किया गया। दो मामलों में ईसी ट्रांसफर, 2 में एक्सटेंशन हुई।

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