राष्ट्रीय स्वयंसेवक शून्य से शिखर तक, 119 देशों तक फैला संगठन
भोपाल, सबकी खबर।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने जा रहा है। 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा स्थापित इस संगठन ने एक सदी की यात्रा में न केवल भारत बल्कि दुनिया के 119 देशों तक अपने कार्यों का विस्तार किया है। इनमें से 66 देशों में प्रतिदिन शाखाएं संचालित हो रही हैं। संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर उसके योगदान और भूमिका को लेकर विभिन्न स्तरों पर चर्चा तेज है। सबकी खबर के साथ विशेष बातचीत में आरोग्य भारती और राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य और संघ से लंबे समय से जुड़े मिहिर झा ने कहा कि “संघ का मूल कार्य आज भी व्यक्ति निर्माण और समाज जागरण है। यही व्यक्ति निर्माण राष्ट्र निर्माण का आधार है।”
समाजसेवा से राजनीति तक संघ की भूमिका
मिहिर झा के अनुसार संघ ने बीते वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, श्रमिक, किसान और आदिवासी क्षेत्रों में व्यापक काम किया है। सेवा भारती, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, मजदूर संगठनों समेत कई मोर्चों पर स्वयंसेवक सक्रिय हैं। अस्पतालों, वृद्धाश्रमों और अनाथालयों में सेवा कार्य संघ की पहचान बन चुके हैं। राजनीतिक प्रभाव पर बोलते हुए उन्होंने माना कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संघ का अनुशंगिक संगठन है। आज देश के 18 मुख्यमंत्री और दो प्रधानमंत्री संघ की विचारधारा से जुड़े रहे हैं। दो राष्ट्रपति भी संघ के स्वयंसेवक रह चुके हैं।
मुसलमानों के बीच संवाद
संघ द्वारा चलाए जा रहे मुस्लिम जागरण मंच पर मिहिर झा ने कहा कि “सभी मुसलमान देशद्रोही नहीं होते। संघ का उद्देश्य है इस्लाम का राष्ट्रीयकरण और चर्च का भारतीयकरण है। कई मुस्लिम परिवार अब अपने भारतीय मूल की पहचान स्वीकार कर रहे हैं।”
विरोधियों के साथ भी सहयोग
इतिहास का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अतीत में पंडित नेहरू और इंदिरा गांधी जैसी कांग्रेस सरकारों ने भी युद्धकाल और आपदाओं में संघ से मदद ली थी। संघ का मानना है कि राष्ट्रहित सर्वोपरि है, इसलिए किसी भी दल या विचारधारा के साथ मिलकर काम करने में उसे परहेज नहीं।
बदलती छवि और चुनौतियां
संघ की कार्यशैली को लेकर यह भी आरोप लगते हैं कि सत्ता के समीप आने से उसके स्वयंसेवक अब पहले की तरह तपस्वी नहीं रहे। इस पर झा ने कहा कि “अवसरवादी लोग समय के साथ आते-जाते रहते हैं, लेकिन वास्तविक स्वयंसेवक संघ से कभी अलग नहीं होते।”
100 वर्ष की यात्रा
संघ ने आज तक स्वयं को रजिस्टर्ड संगठन नहीं बनाया है। बावजूद इसके उसकी शाखाएं और गतिविधियां देश-विदेश में निरंतर बढ़ रही हैं। आज स्थिति यह है कि छोटे से गांव या कस्बे में भी संघ का कोई न कोई स्वयंसेवक जरूर मिल जाता है। मिहिर झा ने संघ की शताब्दी यात्रा को “शून्य से शिखर तक की यात्रा” बताते हुए कहा कि “भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र बनेगा और विश्वगुरु बनने में संघ की भूमिका अहम रहेगी।

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