ब्लैकमेलर्स की लिस्ट तैयार कराने पर नेता प्रतिपक्ष को आपत्ति:सिंघार बोले- शिकायतकर्ताओं के बजाय कम्प्लेन फोर्स क्लोज करने वाले अफसरों की बनाएं कुंडली
भोपाल।
सीएम हेल्पलाइन और अन्य पोर्टल पर झूठी और आदतन शिकायत करने वाले तथा ब्लैकमेलर्स की लिस्ट तैयार कराने के सरकार के फरमान पर विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आपत्ति की है और इसे वापस लेने को कहा है। सिंघार ने कहा कि मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार भी ग़जब है। प्रदेश की जनता की समस्याओं का समाधान करने में असफल रही तो अब शिकायतकर्ताओं को “ब्लैकमेलर” और “आदतन शिकायती” बताकर डराने तथा उनके नामों की सूची बनवाने का नया तरीका निकाल लिया है। शिकायतकर्ताओं की कुंडली बनाने के बजाय उन अधिकारियों की सूची तैयार की जानी चाहिए जिन्होंने गलत जवाब देकर शिकायतें जबरन फोर्स क्लोज कराईं। सच्चाई यह है कि पूरे मध्यप्रदेश में सीएम हेल्पलाइन पर हजारों शिकायतें अधिकारियों ने बिना समाधान किए फोर्स क्लोज कर दी हैं। इस आदेश की आड़ में अधिकारी यही चाहते हैं कि जो जागरूक नागरिक जनता की समस्याओं को लेकर शिकायत करें, उन्हें उल्टा केस में फंसाकर परेशान किया जा सके। ये बात विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कही। उन्होंने कहा कि ब्लैकमेलर्स की रिपोर्ट तैयार करने का आदेश लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं पर सीधा प्रहार है। लोकतंत्र में यदि नागरिक अपनी समस्या सरकार को नहीं बताएगा तो किससे कहेगा?
झूठे जवाब दर्ज करते हैं अधिकारी-कर्मचारी
उन्होंने कहा कि असलियत यह है कि अधिकारी-कर्मचारी पैसों और दबाव के चलते शिकायतों पर झूठे जवाब दर्ज कर रहे हैं और उन्हें बंद करा रहे हैं। शिकायतकर्ताओं की कुंडली बनाने के बजाय उन अधिकारियों की सूची तैयार की जानी चाहिए जिन्होंने गलत जवाब देकर शिकायतें जबरन फोर्स क्लोज कराईं। मध्यप्रदेश में ऐसे हजारों उदाहरण मौजूद हैं।
इस आदेश को वापस लें सीएम
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने कहा कि वे यह मांग करते हैं कि मुख्यमंत्री तत्काल इस आदेश को वापस लें। सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने के लिए बनी है, न कि शिकायतकर्ताओं को ब्लैकमेलर घोषित करने के लिए।
गौरतलब है कि लोक सेवा प्रबंधन विभाग ने 25 सितंबर को एक आदेश जारी कर सभी कलेक्टरों से कहा है कि झूठी और आदतन शिकायतें करने वाले तथा ब्लैकमेलर्स की लिस्ट मोबाइल नंबर के साथ एक फार्मेट में तैयार कर सरकार को भेजें ताकि सरकार इस मामले में कोई फैसला कर सके।
कोई गलत करता है तो एफआईआर कराएं
आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे ने भी इसका विरोध करते हुए शुक्रवार को कहा था कि सरकार का यह कदम गलत है। लोकतंत्र में शिकायत सरकार से की जाती है। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है लेकिन कोई गलत काम करता है तो एफआईआर करिए, कार्रवाई कीजिए लेकिन कलेक्टरों से बड़े पैमाने पर इस तरह का अभियान चलाकर जानकारी जुटाना आम नागरिकों में भय पैदा करने जैसा है। जनता शिकायत करने से कतराएगी, कोई विवाद नहीं चाहती है। सरकारी अधिकारी अगर किसी मामले में कुछ गलत मानते हैं तो पुलिस में जाएं न कि जनता में इस तरह का भय का माहौल बनाएं।

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