'संस्कार' और 'परंपराओं' के नाम पर विपक्ष को घेरने की कोशिश में बीजेपी नेता, खुद क्लीन बोल्ड हो रहे
भोपाल।
मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी का सिलसिला थम नहीं रहा है। हाल ही में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के मंच पर चुंबन को लेकर एक टिप्पणी की। उन्होंने कहा, 'कौन सा जवान भाई अपनी जवान बहन को चौराहे पर चुंबन करता है, यह संस्कारों की कमी है।' इस बयान से प्रदेश की सियासत में भूचाल आ गया है। कांग्रेस ने इस पर तीखा हमला किया है। बीजेपी के अंदर भी कुछ लोग इस बयान से सहमत नहीं हैं। यह मामला व्यक्तिगत, राजनीतिक और सांस्कृतिक सवाल खड़े कर रहा है।
मध्य प्रदेश की राजनीति में हलचल
कैलाश विजयवर्गीय की इस टिप्पणी ने प्रदेश की राजनीति में बड़ी हलचल मचा दी है। उनके इस बयान से कांग्रेस को बीजेपी पर हमला करने का मौका मिला है। बीजेपी के अंदर भी इस बयान को लेकर असहमति दिख रही है। यह मामला सिर्फ एक बयान तक सीमित नहीं है। इसने भाई-बहन के रिश्ते और महिलाओं के निजी जीवन पर भी सवाल खड़े किए हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने यहां तक कह दिया कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सीएम न बन पाने की टीस में ऐसे बयान दे रहे हैं।
घेरने की कोशिश में खुद घिरते नेता
बीजेपी 'संस्कारों' और 'परंपराओं' के नाम पर विपक्षी नेताओं को घेरने की कोशिश करती है। लेकिन, अब यह कोशिश उल्टे परिणाम दिखा रही है। जनता और सोशल मीडिया पर ऐसे बयानों को लेकर भारी नाराजगी है। विपक्ष को सत्तारूढ़ दल की छवि पर सवाल उठाने का मौका मिल रहा है।
बयानों से लोगों में नाराजगी
राजनीतिक बयानबाज़ी के इस दौर में सवाल उठता है कि क्या नेताओं को निजी और पारिवारिक रिश्तों पर ऐसी तीखी टिप्पणियां करनी चाहिए? क्या यह राजनीति की मर्यादा में आता है? भाई-बहन के रिश्ते और महिलाओं के व्यक्तिगत जीवन पर ऐसे बयानों से लोग नाराज़ हैं। सोशल मीडिया पर यह बहस चल रही है कि सार्वजनिक बयान देते समय निजी सीमाओं का ध्यान रखना कितना ज़रूरी है। मध्य प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी अब एक हथियार बन गई है। यह कभी-कभी सियासत से आगे बढ़कर सामाजिक तनाव भी पैदा करती है। मंत्री विजय शाह का बयान इसका उदाहरण है।
ऑपरेशन सिंदूर पर की थी विवादित टिप्पणी
मध्य प्रदेश के एक और मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर पर बोलते हुए कर्नल सोफिया अंसारी पर विवादित टिप्पणी कर दी थी। इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने संज्ञान लिया था। मामले की सुनवाई अभी तक चल रही है। इस बयान के बाद मंत्री के साथ ही पार्टी की भी पूरे देश में किरकिरी हुई थी। वरिष्ठ नेताओं ने मंत्री को दिल्ली तलब कर समझाइश दी थी।

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