भोपाल। 
मध्य प्रदेश की करीब 23 हजार ग्राम पंचायतों को अब अपने बिजली बिल का भुगतान खुद करना होगा। राज्य सरकार ने पंचायतों को दी जाने वाली अनुदान राशि में कटौती करते हुए कलेक्टरों और जिला पंचायत सीईओ को निर्देश दिए हैं कि पंचायतों की आय बढ़ाने के प्रयासों की 15 दिन में समीक्षा करें। पंचायत और ग्रामीण विकास विभाग ने कहा है कि पंचायतों के जिन कनेक्शनों का उपयोग सीधे ग्राम पंचायत करती हैं, उनका बिल पंचायतों को चुकाना होगा। वहीं जिन कनेक्शनों का उपयोग अन्य विभाग, संस्थान या संगठन कर रहे हैं, उनके बिल का भुगतान संबंधित विभाग या संस्था करेगी। इसके लिए पंचायतों को बिजली कनेक्शनों का ऑडिट करने को कहा गया है।
ये कनेक्शन पंचायतों से जुड़े माने जाएंगे
नल-जल योजना, स्ट्रीट लाइट, पंचायत कार्यालय, सामुदायिक भवन, मांगलिक भवन, गौशाला, आंगनबाड़ी, स्कूल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, वृद्धाश्रम, हाट बाजार, पर्यटन स्थल और मेला जैसे कनेक्शन पंचायतों की जिम्मेदारी माने जाएंगे।
समय पर बिल न चुकाने से बढ़ रहा सरचार्ज
विभाग ने स्पष्ट किया है कि पंचायतों द्वारा समय पर बिल भुगतान न करने से सरचार्ज जुड़ रहा है, जिससे बकाया राशि लगातार बढ़ रही है। अनुपयोगी कनेक्शन काटने के निर्देश भी पंचायतों को दिए गए हैं।
अनुदान में कटौती का असर
अब तक पंचायतों की बकाया बिजली राशि का भुगतान राज्य स्तर से 5वें वित्त आयोग की राशि से किया जाता था, लेकिन अब वित्त वर्ष 2025-26 से यह व्यवस्था खत्म कर दी गई है। ऐसे में पंचायतों को अपनी आय या फिर अनुदान की राशि से बिल चुकाना होगा।
सरपंच और सचिव पर होगी कार्रवाई
हर पंचायत से कहा गया है कि 1 से 5 तारीख के बीच नियमित रूप से हर घर से जल-कर वसूला जाए और इसकी समीक्षा हर 15 दिन में की जाए। यदि पर्याप्त राशि होने के बावजूद पंचायतें बिल का भुगतान नहीं करतीं तो सरपंच और सचिव पर वैधानिक कार्रवाई होगी।
आत्मनिर्भर पंचायतों की दिशा में कदम
विभाग का कहना है कि पंचायतों को बिजली बिल का भार उठाने के साथ ही अपनी आय बढ़ाने के उपाय भी करने होंगे। संपत्ति कर, जल-कर और अन्य स्रोतों से आय बढ़ाकर अनुदान राशि का उपयोग केवल विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा। साथ ही आने वाले समय में बिजली कंपनियां स्मार्ट प्री-पेड मीटर लगाएंगी।